Turkman Gate: जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतासिम खान ने दिल्ली के तुर्कमान गेट के पास अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि जब तक कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता, एमसीडी और अधिकारियों को सब्र रखना चाहिए। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में मलिक मोतासिम खान ने कहा कि तुर्कमान गेट के पास मस्जिद को लेकर मुसलमानों का मानना है कि यह वक्फ की जमीन है और उनकी प्रॉपर्टी है।
प्रशासन को सब्र से काम करना चाहिए
मस्जिद के नजदीक मुस्लिम समुदाय के लोगों ने दवाखाना, बारात घर और कुरान की तालीम के लिए कुछ कमरे बनाए थे। मस्जिद के साथ उससे जुड़ी हुई एक जगह होती है, जहां लोग नमाज के लिए तैयारी करते हैं। मुसलमानों का कहना है कि यह वक्फ की जमीन है, जबकि सरकार का दावा है कि यह सरकारी जमीन है और इस पर कब्जा किया गया है। यही असली विवाद है। उन्होंने कहा कि जब मामला कोर्ट में है, तो क्यों इतनी जल्दी कार्रवाई की गई? यह प्रशासन की ज्यादती है। मान लिया जाए कि अवैध अतिक्रमण था, लेकिन वहां बने वजूखाने और अन्य सुविधाओं को लेकर बातचीत हो सकती थी। रात को आकर 17 बुलडोजर और ट्रक लेकर आए व सैकड़ों पुलिसवाले खड़े हो गए, जिससे दहशत फैली।
मलिक मोतासिम खान ने फिर दोहराया कि प्रशासन को सब्र से काम करना चाहिए और कोर्ट के आदेशों का इंतजार करना चाहिए। वहीं जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष ने पत्थरबाजी को लेकर कहा कि जब पुलिस आती है, तो लोगों को लगता है कि उनकी पूजा की जगहों को तोड़ा जा रहा है। ऐसे माहौल में अफवाहें फैलती हैं कि मस्जिद तोड़ी जा रही है या सिर्फ उसके बाहर का अतिक्रमण। जनता में हर तरह के लोग होते हैं। प्रशासन को दिन में कार्रवाई करनी चाहिए थी। आपने यह काम रात 1:30 बजे किया।
Turkman Gate: इलाके में रहने वाले लोग क्या बोले?
वहीं तुर्कमान गेट इलाके में रहने वाले लोगों का आरोप है कि दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने अतिक्रमण हटाने के दौरान मस्जिद के कुछ हिस्से को भी नुकसान पहुंचाया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इसी कारण इलाके में आक्रोश फैल गया और लोग सड़कों पर उतर आए। एमसीडी ने यह कार्रवाई रात करीब 1 बजे शुरू की, जो सुबह 7 बजे तक चली। बताया जा रहा है कि अतिक्रमण हटाने के लिए 30 से अधिक बुलडोजरों का इस्तेमाल किया गया। फिलहाल फैज़-ए-इलाही मस्जिद के सामने वाली गली को बंद कर दिया गया है, जिससे वहां रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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