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योगी सरकार में मदरसों की पढ़ाई से मोहभंग, 10 साल में 80% तक गिरी छात्रों की संख्या,आंकड़े, कारण और पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

उत्तर प्रदेश में मदरसों की पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था से विद्यार्थियों और अभिभावकों का रुझान तेजी से घटता जा रहा है। बीते दस वर्षों में प्रदेश के अनुदानित और मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में करीब 80 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है।

UP Madarsa News: उत्तर प्रदेश में मदरसों की पारंपरिक शिक्षा व्यवस्था से विद्यार्थियों और अभिभावकों का रुझान तेजी से घटता जा रहा है। बीते दस वर्षों में प्रदेश के अनुदानित और मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या में करीब 80 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है। शिक्षा विशेषज्ञ इस बदलाव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार की सख्त निगरानी, पारदर्शी व्यवस्था और मुख्यधारा व रोजगारोन्मुखी शिक्षा पर जोर से जोड़कर देख रहे हैं।

आधिकारिक रिकॉर्ड की तस्वीर चौंकाने वाली 

उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के आधिकारिक रिकॉर्ड चौंकाने वाली तस्वीर पेश करते हैं। वर्ष 2016 में मदरसों में 4,22,667 छात्र-छात्राएं पंजीकृत थे, जो 2017 में घटकर 3,71,052 रह गए। इसके बाद गिरावट लगातार तेज होती गई। 2018 में संख्या घटकर 2,70,755, 2019 में 2,06,337 ,2020 में 1,82,259, 2022 में 1,63,999 और 2025 में यह आंकड़ा सिमटकर मात्र 88,082 रह गया। यानी एक दशक में करीब 3.3 लाख छात्र मदरसों की शिक्षा व्यवस्था से बाहर हो गए, जिसे शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

UP Madarsa News: जिलावार आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

जिलों की स्थिति और भी चिंताजनक है। जालौन जिले के अनुदानित मदरसों से इस साल परीक्षा के लिए केवल एक छात्र ने आवेदन किया। अलीगढ़ से 6, जबकि एटा, बागपत और इटावा से सिर्फ 8-8 छात्रों ने आवेदन किया। वहीं अपेक्षाकृत अधिक आवेदन प्रयागराज (644), मऊ (636), आजमगढ़ (497), सिद्धार्थनगर (478) और लखनऊ (477) से सामने आए।

योगी सरकार की नीतियों का असर

2017 के बाद योगी सरकार ने मदरसों की फंडिंग, पंजीकरण और पाठ्यक्रम को लेकर सख्त कदम उठाए। बिना मान्यता चल रहे मदरसों पर कार्रवाई, फर्जी पंजीकरण की जांच और एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू करने से पारंपरिक व्यवस्था पर दबाव बढ़ा। इसके समानांतर सरकारी स्कूलों, आईटीआई, पॉलिटेक्निक, स्किल डेवलपमेंट और डिजिटल शिक्षा को मजबूत किया गया।

शिक्षक बढ़े, छात्र घटे

दिलचस्प तथ्य यह है कि छात्रों की संख्या घटने के बावजूद बीते 10 वर्षों में 3,000 से अधिक मदरसा शिक्षकों की भर्ती हुई है। इसके बावजूद छात्रों का बाहर जाना साफ संकेत देता है कि अब अभिभावक करियर और रोजगार आधारित शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव योगी सरकार के उस विजन को दर्शाता है, जिसमें शिक्षा को आत्मनिर्भरता और रोजगार से जोड़ने पर जोर है। आने वाले वर्षों में यह गिरावट और गहराने की संभावना जताई जा रही है।

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