UP News: मुरादाबाद शहर में आयोजित एक निजी कार्यक्रम के दौरान प्रसिद्ध समाजसेवी और अध्यात्मिक विचारक आचार्य प्रमोद कृष्णम ने रमज़ान के पवित्र महीने और लाउडस्पीकर के विवादित मुद्दे पर अपनी राय स्पष्ट करते हुए कहा कि रमज़ान केवल इबादत, मोहब्बत और भाईचारे का महीना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसे राजनीतिक या सामाजिक विवादों से जोड़ना सही नहीं है।
आचार्य प्रमोद ने अपने संबोधन में कहा कि रमज़ान इबादत का महीना है। इस्लाम किसी को तकलीफ पहुंचाने की इजाज़त नहीं देता। इबादत केवल इंसान की नियत और आस्था से होती है, लाउडस्पीकर से नहीं। धर्म के नाम पर राजनीति करना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर धार्मिक आयोजन में आवाज़ पहुंचाने के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग करना पड़े, तो वह एक अलग विषय है, लेकिन इसे लेकर राजनीतिक तनाव पैदा करना अनुचित है। आचार्य प्रमोद ने कुछ नेताओं पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि पवित्र रमज़ान के महीने में समाज को इबादत, संयम और भाईचारे पर ध्यान देना चाहिए, न कि अनावश्यक विवाद खड़ा करना चाहिए।
इस बयान के बाद सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है और इसे अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। कई लोग आचार्य प्रमोद की इस सोच की सराहना कर रहे हैं और इसे सामूहिक सौहार्द्र और धार्मिक सहिष्णुता का उदाहरण बता रहे हैं, वहीं कुछ लोग इसे मौजूदा लाउडस्पीकर विवाद के परिप्रेक्ष्य में भी जोड़कर देख रहे हैं।
वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि आचार्य प्रमोद का यह बयान धार्मिक आस्था और सामाजिक शांति के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास है। उन्होंने लोगों से अपील की कि रमज़ान के पवित्र महीने में व्यक्तिगत और सामूहिक इबादत के महत्व को समझें और इसे केवल आध्यात्मिक दृष्टि से देखें।
Report BY: सलमान युसूफ
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