UP News: उत्तर प्रदेश पुलिस ने अपनी साख और अनुशासन को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए ललितपुर में तैनात हेड कांस्टेबल जितेंद्र यादव को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। यह फैसला करीब चार महीने तक चली विभागीय जांच के बाद लिया गया, जिसमें आरोपी पर लगे गंभीर आरोप सही पाए गए।
पहले जानें मामला…
अपर पुलिस अधीक्षक कालू सिंह के अनुसार, जितेंद्र यादव पर प्रधान लिपिक शाखा में तैनाती के दौरान पुलिसकर्मियों से अवकाश पत्रावलियों के निस्तारण के नाम पर अवैध धन की मांग करने के आरोप थे। इसके साथ ही, एक महिला सहायक उपनिरीक्षक (लिपिक) को अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल कर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, धमकाने और उसकी छवि खराब करने की कोशिश करने के भी आरोप सामने आए।
मामले की प्रारंभिक जांच एएसपी स्तर पर कराई गई, जिसमें आरोपी प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया। इसके बाद निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जांच झांसी ग्रामीण के अपर पुलिस अधीक्षक डॉ. अरविंद कुमार को सौंपी गई। उनकी विस्तृत जांच में भी सभी आरोपों की पुष्टि हुई। जिसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर 24 मार्च को उत्तर प्रदेश अधीनस्थ श्रेणी के पुलिस अधिकारियों की (दंड एवं अपील) नियमावली-1991 के तहत कार्रवाई करते हुए आरोपी को सेवा से पदच्युत कर दिया गया।
UP News: जांच के दौरान क्या पता चला?
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी पुलिसकर्मियों की बातचीत रिकॉर्ड कर उन्हें ब्लैकमेल करता था। इसके अलावा, विवादित जमीनों पर कब्जा कराने, अवैध वाहन खरीद-फरोख्त और अपराधियों के साथ साजिश रचने जैसे गंभीर मामलों में भी उसकी संलिप्तता पाई गई। विभागीय अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी द्वारा सोशल मीडिया पर वरिष्ठ अधिकारियों और विभाग के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार और भ्रामक थे। वहीं इस मामले में पुलिस विभाग का कहना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई यह दर्शाती है कि अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार और महिला उत्पीड़न जैसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग अपनी छवि को बेहतर बनाने और जनता का भरोसा कायम रखने के लिए लगातार ऐसे कड़े फैसले ले रहा है।
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