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इस्लामाबाद मस्जिद हमले के विरोध में मुरादाबाद में कैंडल मार्च, इमाम-ए-मेहदी यूथ मिशन ने जताया रोष

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद

UP News: पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित एक शिया मस्जिद पर हुए आतंकी हमले में मारे गए निर्दोष लोगों की याद में मुरादाबाद में व्यापक स्तर पर शोक सभा और कैंडल मार्च का आयोजन किया गया। इमाम-ए-मेहदी यूथ मिशन WS (रजि.) के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और युवा संगठनों ने भाग लेकर आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता इमाम-ए-जुमा मुरादाबाद मौलाना अली हैदर नूरी साहब ने की, जबकि संचालन मौलाना गाज़ी साहब ने किया। शोक सभा की शुरुआत पवित्र कुरआन के पाठ और दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए दुआ के साथ हुई। उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर हमले में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित की।

अपने संबोधन में वक्ताओं ने पाकिस्तान में शिया समुदाय पर हो रहे लगातार हमलों की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्मस्थल पर हमला केवल एक समुदाय पर नहीं, बल्कि पूरी मानवता और सभ्यता पर हमला है। वक्ताओं का कहना था कि यदि किसी देश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा पा रही है, तो यह उस व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी इस तरह की घटनाओं पर संज्ञान लेने और आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने की अपील की।

मिशन के अध्यक्ष हसन जैदी एडवोकेट ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ केवल बयानबाजी पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा, “जो सरकारें आतंकवाद पर चुप्पी साध लेती हैं या ठोस कार्रवाई नहीं करतीं, वे भी अप्रत्यक्ष रूप से जिम्मेदार बन जाती हैं। अब समय आ गया है कि वैश्विक स्तर पर एकजुट होकर ऐसी शक्तियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जाए।”

शोक सभा के बाद शहर में शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। हाथों में मोमबत्तियां और बैनर लिए लोग आतंकवाद के खिलाफ नारे लगाते हुए आगे बढ़े। इस दौरान “आतंकवाद मुर्दाबाद”, “बेगुनाहों की हत्या बंद करो” जैसे नारे लगाए गए। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार की नीतियों के विरोध में नाराजगी जताई और प्रतीकात्मक रूप से पुतला दहन भी किया।

कार्यक्रम में इमामबाड़ा कमेटी के सचिव डॉ. क़याम रज़ा, क़मर अब्बास, मौलाना तनवीर, सलीम रज़ा, ज़ैनुल इबाद काज़मी, वसी अब्बास नक़वी, मीसम नक़वी, राजू नाज़िश, मासूम रज़ा, मेराज पाशा, खुशनूद अनवर, शबाब नक़वी, काशिफ, असकरी, शजर मेहदी, आमिर खान, असद खान, परवेज़, शाहिद, कलाम, अधिवक्ता दानिश रिज़वी, अली वाहिद, आक़िल असबात हुसैन, गजनफर जैदी, प्रिंस काजमी एडवोकेट, शाह आलम, सादिक आब्दी, अनीस हैदर, बाबर, मोहम्मद अली, जफर अब्बास, इमदाद हुसैन सैफी, रईस पाशा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शिया और सुन्नी समुदाय के लोगों की उल्लेखनीय भागीदारी रही, जिसने सांप्रदायिक सौहार्द और एकता का संदेश दिया।

अंत में वक्ताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि आतंकवाद के खिलाफ यह संघर्ष किसी एक मजहब या समुदाय का नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत की साझा लड़ाई है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए वैश्विक स्तर पर ठोस और प्रभावी कार्रवाई की मांग दोहराई, ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

Report By: सलमान युसूफ 

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