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UP बना देश का ‘EV पावरहाउस’! 19% से ज्यादा हिस्सेदारी के साथ नंबर वन की ओर बढ़ता प्रदेश

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UP News: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए सोमवार को विधान परिषद में कहा कि सरकार ने उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को अग्रणी बनाने की दिशा में बड़े कदम उठाए हैं। यही वजह है कि पूरे देश में बिक रहे इलेक्ट्रिक व्हीकल में प्रदेश की भागीदारी 19 प्रतिशत पहुंच चुकी है। सरकार ने एआई, डिजिटल टेक्नोलॉजी, डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर और डाटा साइंस जैसे सेक्टर में तेजी से कार्य करते हुए इसे विकास की मुख्य धारा से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में कोविड कालखंड के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति दी, जिसने शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी। प्रदेश सरकार ने भी इसी दृष्टिकोण को अपनाते हुए अपने कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया है।

एआई देश का एक महत्वपूर्ण इमर्जिंग सेक्टर

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने वर्तमान बजट में इमरजिंग टेक्नोलॉजी से जुड़े सभी क्षेत्रों में विशेष प्रावधान किए हैं। आज के समय में डाटा सबसे बड़ी ताकत बन चुका है। इसी को ध्यान में रखते हुए बजट में स्टेट डाटा अथॉरिटी के गठन का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही डाटा सेंटर क्लस्टर की स्थापना के लिए भी व्यवस्था की गई है, क्योंकि एआई और डिजिटल सेक्टर में प्रगति के लिए मजबूत डाटा इन्फ्रास्ट्रक्चर अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि एआई आज देश का एक महत्वपूर्ण इमर्जिंग सेक्टर बन चुका है। प्रदेश सरकार ने एआई और डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देने के लिए वोकेशनल एजुकेशन, टेक्नोलॉजी एजुकेशन तथा माध्यमिक शिक्षा स्तर पर भी विशेष बजट का प्रावधान किया है, ताकि विद्यार्थियों को प्रारंभिक स्तर से ही आधुनिक तकनीकों का ज्ञान मिल सके। इस दिशा में टाटा टेक्नोलॉजिस और सैमसंग के साथ साझेदारी कर कार्य तेज़ी से प्रारंभ किया गया है।

युवाओं को आत्मनिर्भर और उद्यमी बनाने के उद्देश्य से सीएम युवा उद्यमी योजना के तहत हर वर्ष डेढ़ लाख युवा उद्यमी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना के तहत युवाओं को मार्जिन मनी के साथ-साथ गारंटी मुक्त और ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। एमएसएमई और ओडीओपी जैसे कार्यक्रम भी इसी दिशा में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। डिजिटल रूप से सक्षम युवा तैयार करने के लिए स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के तहत टैबलेट वितरण योजना को भी तेजी से लागू किया जा रहा है, ताकि प्रदेश का नौजवान तकनीकी रूप से सशक्त बन सके और आधुनिक अवसरों का लाभ उठा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश ने नौ वर्षों में पर्यटन, हॉस्पिटिलिटी और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। प्रदेश अब पारंपरिक उद्योगों तक सीमित न रहकर नई तकनीकों और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रदेश ऑटोमेशन और डाटा आधारित निर्णय प्रणाली को अपनाते हुए एआई रोबोटिक्स, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, ड्रोन, साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे क्षेत्रों में एक साथ प्रगति कर रहा है।

UP News: इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में यूपी का महत्वपूर्ण कदम 

इलेक्ट्रिक व्हीकल सेक्टर में भी उत्तर प्रदेश ने महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। हाल ही में लखनऊ में प्रदेश की पहली इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना हुई है। इसके साथ ही राज्य में इस क्षेत्र से जुड़े कई नए निवेश प्रस्ताव भी लगातार आ रहे हैं। आज देश में जितने भी इलेक्ट्रिक व्हीकल देश में खरीदे जा रहे हैं, उनमें से 19 फीसदी से अधिक हिस्सा यूपी का है। वहीं, तिपहिया वाहनों में 40 फीसदी से अधिक भागीदारी है। फेम-1 और फेम-2 के प्रमुख लाभार्थी यूपी के हैं। एक्सप्रेस कॉरिडोर पर चार्जिंग स्टेशन की स्थापना और 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन यूपी में हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की बदलती पहचान का एक महत्वपूर्ण आधार युवा शक्ति है। स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया के माध्यम से उत्तर प्रदेश का युवा तेजी के साथ अपनी एक नई धमक और पहचान बना रहा है। आज प्रदेश में 20,000 से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं। इसके अतिरिक्त 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 8 यूनिकॉर्न हैं। आज प्रदेश के युवा नेतृत्व और इनोवेशन की ताकत को न केवल प्रदेश बल्कि पूरा देश देख रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब युवा स्वावलंबन की दिशा में आगे बढ़ता है और आत्मनिर्भर बनता है, तो बेरोजगारी की दर अपने आप कम हो जाती है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में बेरोजगारी दर 19 प्रतिशत से अधिक थी, जो अब घटकर 2.24 प्रतिशत तक पहुंच गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास तेजी के साथ हुआ है।

हर गांव में खेल का मैदान, हर ब्लॉक स्तर पर मिनी स्टेडियम, और हर जनपद में स्टेडियम का निर्माण तेजी से हो रहा है। मेजर ध्यानचंद के नाम पर मेरठ में प्रदेश की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी तैयार है। इस बार बजट में हर डिवीजनल हेडक्वार्टर पर एक स्पोर्ट्स कॉलेज बनेगा जिसे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित करने के लिए प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने ओलंपिक, एशियाड, कॉमनवेल्थ में मेडल प्राप्त करने वाले 500 से अधिक खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी दी है। वहीं, वर्ष 2030 के कॉमनवेल्थ गेम्स अहमदाबाद और वर्ष 2036 के ओलंपिक के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को विकसित करने की कार्यवाही को तेज कर दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब समाजवादी पार्टी विकास की बात करती है और वर्तमान सरकार की विकास योजनाओं या बजट पर टिप्पणी करती है, तो हंसी आती है। उन्होंने कहा कि जिन्हें चार-चार बार अवसर मिलने के बाद भी प्रदेश में विकास की कोई ठोस योजना आगे बढ़ाने में सफलता नहीं मिली, वे आज विकास का आईना दिखाने की बात कर रहे हैं।

समाजवादी पार्टी का विकास मॉडल परिवारवादी, तुष्टीकरण आधारित और दंगाइयों को पल्लवित-पोषित करने वाला था। उन्होंने कहा कि देश में आपातकाल के खिलाफ शंखनाद करने वाले लोकनायक जयप्रकाश नारायण उत्तर प्रदेश की धरा पर जन्मे थे। हमारी सरकार को इस बात पर गौरव की अनुभूति होती है कि हमने जेपी की अंतिम इच्छा का सम्मान किया है। उनकी जन्मभूमि पर अस्पताल निर्माण और बेहतर कनेक्टिविटी की व्यवस्था की गई है। जेपी के नाम पर राजनीति करने वाले यह कार्य नहीं कर पाए, लेकिन हमारी सरकार ने इसे पूरा किया और मुझे दो बार उनकी जन्मभूमि पर जाने का अवसर भी मिला। जेपीएनआईसी परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट 200 करोड़ रुपए की बनी, लेकिन 800 करोड़ रुपए खर्च होने के बाद भी परियोजना अधूरी रही। यह समाजवादी पार्टी के विकास मॉडल का उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रिवर फ्रंट परियोजना 300 करोड़ रुपए की थी, लेकिन 1400 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद अधूरी रही। समाजवादी सरकार में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे परियोजना का एलाइनमेंट तय कर टेंडर अवार्ड कर दिए, जबकि भूमि अधिग्रहण नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि किसी भी परियोजना में 80 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण से पहले टेंडर प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा सकती, लेकिन यहां “अवैध तरीके” से टेंडर किए गए। उस समय परियोजना की डीपीआर बनी थी, जो 15,200 करोड़ रुपए की थी। एक्सप्रेसवे को 110 मीटर चौड़ा और 390 किलोमीटर लंबा बनाया जाना था। मार्च में सरकार बनने के बाद मई में उन्होंने इसकी प्रगति की समीक्षा की। उन्हें बताया गया कि प्रगति शून्य है, क्योंकि भूमि अधिग्रहण नहीं हुआ था।

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