UP News: मुरादाबाद जिले की सियासत इन दिनों अचानक गरमा गई है। मुख्य बाजार बुद्ध बाज़ार क्षेत्र में लगाए गए विवादित नारों वाले पोस्टरों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इन पोस्टरों में लिखे संदेशों को लेकर शहरभर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है और अलग-अलग राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
पोस्टरों पर क्या लिखा?
बुद्ध बाजार और आसपास के इलाकों में लगे पोस्टरों पर लिखे नारे “बटोगे तो कटोगे, एक रहोगे तो सेफ रहोगे” और “कयामत तक बाबरी नहीं बना पाओगे” लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रहे हैं। बाजार में खरीदारी करने आए लोगों से लेकर स्थानीय व्यापारियों तक, हर कोई इन नारों को लेकर अपनी-अपनी राय जाहिर कर रहा है। कुछ लोग इसे एकता का संदेश बता रहे हैं, जबकि अन्य इसे समाज में विभाजन पैदा करने वाली भाषा करार दे रहे हैं।
UP News: संगठन की नेता का नाम सामने
जानकारी के अनुसार ये पोस्टर अखिल भारतीय हिंदू परिषद की प्रदेश मंत्री रीता पाल की ओर से लगाए गए बताए जा रहे हैं। पोस्टरों में रीता पाल ने स्वयं को मुरादाबाद नगर विधानसभा सीट से संभावित प्रत्याशी के रूप में भी प्रस्तुत किया है। इससे इस पूरे प्रकरण को महज वैचारिक विवाद न मानकर संभावित चुनावी रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव से पहले इस तरह के संदेशों के जरिए माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है। पोस्टरों में प्रयुक्त भाषा को लेकर विपक्षी दलों ने आपत्ति जताई है और इसे सामाजिक सौहार्द के लिए खतरा बताया है। हालांकि संबंधित संगठन के समर्थकों का कहना है कि यह संदेश समाज को एकजुट रहने का आह्वान है। अब तक प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। न ही पोस्टरों को हटाने या जांच शुरू करने की पुष्टि की गई है। इससे शहर में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन को समय रहते स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए, ताकि किसी भी तरह की अफवाह या तनाव की स्थिति से बचा जा सके। फिलहाल, पोस्टर वार ने मुरादाबाद के सियासी तापमान को बढ़ा दिया है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
पोस्टरों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। विभिन्न राजनीतिक कार्यकर्ता और सामाजिक संगठन इस मुद्दे पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मामला बता रहे हैं, तो कुछ इसे आचार संहिता और कानून व्यवस्था से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल, पूरे घटनाक्रम ने शहर की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब नजर प्रशासन की कार्रवाई और राजनीतिक दलों की अगली रणनीति पर टिकी है।
Report BY: सलमान युसूफ
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