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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी ‘सड़क’! एक साल में ही उखड़ा कस्बा खीरी-ओयल मार्ग, ट्रामा सेंटर जाने वाले मरीज झेल रहे हिचकोले

गड्ढा मुक्त सड़क

UP News: उत्तर प्रदेश सरकार की ‘गड्ढा मुक्त सड़क’ योजना को लखीमपुर खीरी के विभागीय अधिकारी और ठेकेदार पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ताजा मामला कस्बा खीरी से ओयल ट्रामा सेंटर को जोड़ने वाली मुख्य सड़क का है, जो निर्माण के मात्र एक साल के भीतर ही पूरी तरह बदहाल हो चुकी है। लाखों की लागत से बनी यह सड़क अब मलबे के ढेर में तब्दील हो रही है, जिससे इस मार्ग पर चलने वाले राहगीरों और विशेष रूप से ट्रामा सेंटर जाने वाले मरीजों की जान जोखिम में पड़ गई है।

निर्माण के वक्त ही उठे थे गुणवत्ता पर सवाल

स्थानीय निवासियों और राहगीरों का आरोप है कि जब एक साल पहले इस सड़क का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, तभी इसमें इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। लोगों का कहना है कि मानक के विपरीत घटिया डामर और कम मोटाई की बजरी डालकर खानापूर्ति की गई थी। उस समय स्थानीय लोगों ने विरोध भी दर्ज कराया था और संबंधित अधिकारियों से शिकायत भी की थी, लेकिन भ्रष्टाचार के चश्मे से देख रहे जिम्मेदार अधिकारियों ने शिकायतों को अनसुना कर दिया। परिणाम आज सबके सामने है—सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह गायब हो चुकी है और नुकीली बजरी बाहर निकल आई है।

UP News: गड्ढे या जानलेवा जाल?

कस्बा खीरी से ओयल जाने वाला यह मार्ग सामरिक और चिकित्सीय दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीधे ट्रामा सेंटर को जोड़ता है। सड़क पर जगह-जगह दो से तीन फीट चौड़े गड्ढे बन चुके हैं। दोपहिया वाहन सवार अक्सर इन गड्ढों में गिरकर चोटिल हो रहे हैं। सबसे भयावह स्थिति एम्बुलेंस में आने वाले गंभीर मरीजों की होती है, जिन्हें ट्रामा सेंटर पहुँचने से पहले ही इन गड्ढों के झटकों के कारण असहनीय पीड़ा और जान का खतरा झेलना पड़ता है।

हैरानी की बात यह है कि सड़क के उखड़ने के बाद विभाग ने कई बार इसकी ‘पैचिंग’ (मरम्मत) का दावा किया। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि मरम्मत के नाम पर सिर्फ धूल और गिट्टी डाल दी जाती है, जो पहली ही बारिश या भारी वाहनों के गुजरने के बाद फिर से बाहर निकल आती है। बार-बार की जा रही इस लीपापोती से सरकारी धन का दुरुपयोग तो हो ही रहा है, साथ ही स्थिति जस की तस बनी हुई है।

जनता में भारी आक्रोश

क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यह मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि हजारों लोगों की लाइफलाइन है। सड़क उखड़ने से उड़ने वाली धूल ने आसपास के दुकानदारों और घरों में रहने वाले लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस सड़क का नए सिरे से मानक के अनुसार पुनर्निर्माण नहीं कराया गया, तो वे सड़क जाम कर प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। संजय कुमार राठौर की इस रिपोर्ट के माध्यम से जनता प्रशासन से कुछ सवाल पूछ रही है कि एक साल में सड़क उखड़ी कैसे? क्या निर्माण के समय अधिकारियों ने गुणवत्ता की जांच की थी? दोषी ठेकेदार पर कार्रवाई कब? क्या गारंटी पीरियड में होने के बावजूद ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा? मरीजों की जान का जिम्मेदार कौन? ट्रामा सेंटर मार्ग की ऐसी हालत क्या किसी बड़ी अनहोनी को न्योता नहीं दे रही है?

वहीं कस्बा खीरी-ओयल मार्ग की यह स्थिति लखीमपुर खीरी में लोक निर्माण विभाग और संबंधित कार्यदायी संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है। सरकार भले ही बेहतर कनेक्टिविटी का दावा करे, लेकिन धरातल पर भ्रष्टाचार के गड्ढे इन दावों को खोखला साबित कर रहे हैं। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में कब संज्ञान लेता है और कब इस महत्वपूर्ण मार्ग की तस्वीर बदलती है।

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