UP News: उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। कभी कमजोर कानून व्यवस्था और लालफीताशाही के आरोपों से घिरे इस राज्य में अब सख्त प्रशासन और त्वरित कार्रवाई सरकार की पहचान बनते जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें प्रशासन ने तेजी से कार्रवाई कर यह संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। दरअसल, बीते कुछ समय में सलीम वास्तिक से जुड़ा मामला और बदायूं डबल मर्डर केस जैसे मामलों में सरकार की सक्रियता ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश में अपराध और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया गया है।
सलीम वास्तिक केस में तुरंत कार्रवाई
सलीम वास्तिक से जुड़ा मामला कानून व्यवस्था के लिए एक चुनौती के रूप में सामने आया था। लेकिन इस मामले में पुलिस और प्रशासन की तेजी से हुई कार्रवाई ने साफ कर दिया कि प्रदेश में अराजकता फैलाने वालों के लिए कोई जगह नहीं है। पुलिस की त्वरित जांच, गिरफ्तारी और कार्रवाई ने जनता के बीच यह संदेश दिया कि अपराधी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, वह कानून से ऊपर नहीं है। इस कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर भी व्यापक चर्चा हुई और लोगों ने सरकार के त्वरित एक्शन की सराहना की.
UP News: बदायूं केस में 24 घंटे के भीतर कार्रवाई
ठीक ऐसा ही देखने को मिला बदायूं में, जहां डबल मर्डर केस ने प्रदेश की कानून व्यवस्था को चुनौती दी थी। लेकिन पुलिस ने तेजी दिखाते हुए आरोपी को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया। मामले की निष्पक्ष जांच के लिए बरेली मंडलायुक्त की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। इसके अलावा आरोपी से जुड़ी अवैध संपत्तियों पर भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आरोपी की कई दुकानों पर बुलडोजर कार्रवाई की जा सकती है और शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए जाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
जनपद बदायूं के CBG प्लांट की दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर त्वरित कार्रवाई की गई है।
निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच हेतु मंडलायुक्त बरेली की अध्यक्षता में एक SIT का भी गठन किया गया है।
इस संबंध में अवगत कराना है कि दोषी पहले ही गिरफ्तार है, परंतु इसके बाद भी कोई साजिश की संभावना दिखती…
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) March 14, 2026
सोशल मीडिया पर भी सक्रिय प्रशासन
आज के डिजिटल दौर में शासन-प्रशासन की जवाबदेही केवल जमीन तक सीमित नहीं रह गई है। मुख्यमंत्री कार्यालय और पुलिस के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स पर आने वाली शिकायतों पर भी तेजी से कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों को टैग कर तुरंत निर्देश दिए जाते हैं और कई मामलों में मौके पर ही समाधान भी कराया जाता है। सरकार की यह रणनीति ‘जमीन पर कार्रवाई और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पारदर्शिता’ के मॉडल को मजबूत करती नजर आ रही है। बताते चले कि योगी सरकार की कानून व्यवस्था नीति का मूल आधार ‘जीरो टॉलरेंस’ बताया जाता है। इस नीति के तहत अपराध और भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस एनकाउंटर, अवैध संपत्तियों पर बुलडोजर कार्रवाई और त्वरित जांच जैसी कार्यवाहियों ने प्रदेश की प्रशासनिक छवि को बदलने में अहम भूमिका निभाई है।
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