UP News: बदायूं जिले के बिसौली थाने में हाल ही में एसएचओ राजेंद्र सिंह पुंडीर और दरोगा भूपेंद्र यादव के निलंबन के बाद मामला फिर सुर्खियों में है। पीड़ित फरियादी मोरपाल ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि दरोगा भूपेंद्र यादव की कार्रवाई की वजह से ही एसएचओ को निलंबित किया गया।
पहले जानें क्या था मामला?
फरियादी मोरपाल ने बताया कि उनके भतीजे का 2 मार्च को ई-रिक्शा से एक्सीडेंट हुआ। उन्होंने तुरंत भतीजे को अस्पताल पहुंचाया और पुलिस को तहरीर दी। शुरुआती दौर में दरोगा भूपेंद्र यादव ने उन्हें मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। लेकिन बाद में मोरपाल के साथ दरोगा द्वारा बदसलूकी करने का आरोप सामने आया। मोरपाल ने कहा कि जब उन्होंने मुकदमा दर्ज करने की बात उठाई, तो दरोगा ने गाली-गलौज की और उनका अपमान किया। मोरपाल जन्म से नेत्रहीन हैं और इस घटना ने उनके लिए मानसिक और शारीरिक कठिनाइयों को बढ़ा दिया। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने मामले को लेकर एसएचओ के पास शिकायत की, तो उनकी बात को अनसुना किया गया। इस आरोप ने पुलिस प्रशासन में सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या वरिष्ठ अधिकारी की अनदेखी के कारण आम नागरिक के हक की रक्षा नहीं हो पा रही।
UP News: विवादों से भरा रहा दरोगा का कार्यकाल
दरोगा भूपेंद्र यादव का कार्यकाल विवादों से भरा रहा है। इससे पहले उनकी उसहैत थाने में तैनाती के दौरान एक निजी स्कूल में छात्रों से जुड़े विवाद ने भी उन्हें मुश्किल में डाल दिया था। उस समय कुछ छात्राओं के परिजनों ने आरोप लगाया था कि मुस्लिम छात्रों ने पानी की बोतल में गलत काम किया, और भूपेंद्र यादव ने इस मामले में छात्रों और परिजनों को डराने-धमकाने का काम किया। तत्कालीन एसएसपी डॉ. ब्रजेश सिंह ने उन्हें उसहैत से हटा कर बिसौली कोतवाली में तैनात किया था। स्थानीय प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। पुलिस के निलंबन के बाद मामले की जांच जारी है।
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