UPSC 2026: संघ लोक सेवा आयोग ने आगामी सिविल सेवा और भारतीय वन सेवा परीक्षा-2026 के लिए एक अत्यंत समावेशी और सराहनीय निर्णय लिया है। आयोग के इस नए कदम के तहत अब देश भर के सभी दिव्यांग उम्मीदवारों को उनकी पसंद के आधार पर ही परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाएंगे। इस विशेष व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग अभ्यर्थियों को परीक्षा के दौरान होने वाली शारीरिक और यात्रा संबंधी समस्याओं से निजात दिलाना है। यूपीएससी ने आधिकारिक तौर पर यह सुनिश्चित किया है कि प्रत्येक दिव्यांग आवेदक ने अपने आवेदन पत्र में जिस केंद्र को पहली प्राथमिकता के रूप में चुना है, उसे वही केंद्र आवंटित किया जाए।
UPSC 2026: केंद्रों के चयन और क्षमता प्रबंधन की नई व्यवस्था
आयोग द्वारा स्पष्ट किया गया है कि परीक्षा केंद्रों की वर्तमान क्षमता का उपयोग दिव्यांग और गैर-दिव्यांग दोनों श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए समान रूप से शुरू किया जाएगा। हालांकि, जैसे ही कोई परीक्षा केंद्र अपनी निर्धारित क्षमता तक पहुँच जाएगा, वह सामान्य या गैर-दिव्यांग अभ्यर्थियों के लिए चयन हेतु उपलब्ध नहीं रहेगा। इसके विपरीत, दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। यदि किसी केंद्र की क्षमता पूरी भी हो जाती है, तब भी दिव्यांग अभ्यर्थी उस केंद्र को चुन सकेंगे। आयोग ने यह भी भरोसा दिलाया है कि यदि किसी विशेष केंद्र पर दिव्यांग आवेदकों की संख्या बढ़ती है, तो उनके लिए वहां अतिरिक्त सीटें या क्षमता सृजित की जाएगी ताकि किसी भी परिस्थिति में उन्हें अपने पसंदीदा केंद्र से वंचित न होना पड़े।
UPSC 2026: बढ़ती मांग को देखते हुए परीक्षा केंद्रों का विस्तार
विभिन्न राज्यों में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और उम्मीदवारों की भारी संख्या को देखते हुए यूपीएससी ने अपने परीक्षा केंद्रों के नेटवर्क को और अधिक मजबूत बनाया है। विशेष रूप से दिल्ली-एनसीआर जैसे उच्च मांग वाले क्षेत्रों में दबाव कम करने के उद्देश्य से नए केंद्र जोड़े गए हैं। दिल्ली के बोझ को साझा करने के लिए मेरठ को शामिल किया गया है, जबकि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आवेदकों की भीड़ को प्रबंधित करने के लिए कानपुर में नया केंद्र बनाया गया है। इसी प्रकार, कटक के पास बढ़ते दबाव को देखते हुए भुवनेश्वर को एक प्रमुख केंद्र के रूप में जोड़ा गया है। इन महत्वपूर्ण बदलावों के कारण अब प्रारंभिक परीक्षा के लिए केंद्रों की कुल संख्या 80 से बढ़कर 83 हो गई है। केवल प्रारंभिक परीक्षा ही नहीं, बल्कि मुख्य परीक्षा के ढांचे में भी सुधार किया गया है। मुख्य परीक्षा के लिए केंद्रों की संख्या को 24 से बढ़ाकर 27 कर दिया गया है, जिसमें भुवनेश्वर, श्रीनगर और इंफाल जैसे शहरों को शामिल किया गया है। आयोग का मानना है कि केंद्रों की संख्या में इस बढ़ोतरी से उम्मीदवारों को अपने निवास स्थान के निकट परीक्षा देने की सुविधा मिलेगी और मुख्य केंद्रों पर भीड़ का दबाव भी कम होगा।
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