US Iran Attack: यूनाइटेड स्टेट्स सेंट्रल कमांड ने जानकारी दी है कि ईरान के खिलाफ चल रहे अमेरिकी कॉम्बैट ऑपरेशन में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई है। यह घटना 2 मार्च को हुई जब दोनों देशों के बीच संघर्ष जारी था। अमेरिकी सेना ने हाल ही में दो ऐसे सैनिकों के अवशेष भी बरामद किए हैं जिनकी पहले पहचान नहीं हो पाई थी।
सैन्य अभियान जारी, 1250 लक्ष्य ध्वस्त
सेना की ओर से बताया गया कि अभी भी बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई जारी है। मारे गए सैनिकों की पहचान उनके परिवार वालों को सूचना देने के 24 घंटे बाद तक सार्वजनिक नहीं किया जा रहा है। यह अभियान “एपिक फ्यूरी” नाम के ऑपरेशन का हिस्सा है, जिसमें इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य शक्ति को बड़े पैमाने पर तैनात किया गया है।

जारी फैक्ट शीट के अनुसार, यह सैन्य अभियान अमेरिकी राष्ट्रपति के आदेश पर 28 फरवरी को सुबह 1 बजकर 15 मिनट पर शुरू किया गया था। यह कार्रवाई कमांड के जिम्मेदारी वाले क्षेत्र में की जा रही है और मुख्य लक्ष्य ईरान में मौजूद सैन्य ठिकानों को बनाया गया है।अमेरिकी सेना का उद्देश्य ईरान की सुरक्षा प्रणाली को कमजोर करना है और उन स्थानों पर हमला करना है जो तुरंत खतरा पैदा कर सकते हैं। शुरुआती 48 घंटों में 1250 से ज्यादा लक्ष्यों पर हमले किए गए हैं।
US Iran Attack: भारी हथियारों संग अमेरिकी सैन्य कार्रवाई
इस ऑपरेशन में कई आधुनिक हथियारों और लड़ाकू विमानों का उपयोग किया गया है। इनमें बी-1 बॉम्बर, बी-2 बॉम्बर, एफ-15 फाइटर जेट, एफ-16 फाइटर जेट, एफ-18 फाइटर जेट, एफ-22 फाइटर जेट और एफ-35 फाइटर जेट शामिल हैं। इसके अलावा ए-10 अटैक एयरक्राफ्ट, पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और थाड मिसाइल रक्षा प्रणाली भी तैनात की गई हैं। इस अभियान में परमाणु ऊर्जा से चलने वाले विमानवाहक पोत, निर्देशित मिसाइल विध्वंसक और एमक्यू-9 रीपर ड्रोन भी शामिल हैं।

हमलों के मुख्य निशानों में कमांड और कंट्रोल केंद्र, आईआरजीसी संयुक्त मुख्यालय, आईआरजीसी एयरोस्पेस फोर्स मुख्यालय, एकीकृत वायु रक्षा प्रणाली, बैलिस्टिक मिसाइल ठिकाने, ईरानी नौसेना के युद्धपोत और पनडुब्बियां शामिल हैं।बताया गया है कि एफ/ए-18 फाइटर जेट स्क्वाड्रन लगातार इस ऑपरेशन में सहायता कर रहे हैं। अमेरिकी वायु सेना के विमान दिन और रात उड़ान भरकर भारी फायरपावर उपलब्ध करा रहे हैं।
ओमान की खाड़ी में नौसैनिक तनाव खत्म
अब स्थिति यह है कि ओमान की खाड़ी में ईरान की नौसैनिक मौजूदगी समाप्त हो गई है। दो दिन पहले यहां ईरान के 11 जहाज मौजूद थे, लेकिन अब एक भी जहाज नहीं दिख रहा है।बताया गया है कि ईरान लंबे समय से इस समुद्री क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को बाधित करता रहा है और जहाजों पर हमले भी हुए हैं, लेकिन अब ऐसी घटनाएं कम हो गई हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल हैं क्योंकि यहां से तेल का बड़ा हिस्सा दुनिया के विभिन्न देशों में भेजा जाता है। अगर यहां किसी तरह की बाधा आती है तो वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित हो सकता है, खासकर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।






