US Tarrif: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्टपति ट्रंप के लगाये टैरिफ को गैर कानूनी करार दिया है। न्यायालय के 6-3 जजों के फैसले के आधार पर अमेरिकी अदालत ने निर्णय सुनाया था। ट्रंप ने अपनी आपातकालीन शक्ति कानून के उपयोग के आधार पर मनमर्जी से अलग-अलग देशों पर अपनी सुविधा के अनुसार टैरिफ लगाया। भारत भी उसी आपातकाल की शक्ति का शिकार हुआ।
आज भी वह इसी बात पर अड़ा हुआ है कि भारत पर, जो टैरिफ लगाया है, उसे कम नहीं किया जाएगा। पत्रकारों द्वारा भारत के साथ संबंधों पर पूछने पर ट्रंप कहते हंै कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मेरा दोस्त है। फिर भी मैं टैरिफ कम नहीं करूंगा। जजों के बहुमत ने फैसले में कहा कि यह अधिकार राष्ट्रपति के पास नहीं है। इस बात का फैसला कांग्रेस कर सकती हे। संविधान स्पष्ट रूप से कहता है कि कांग्रेस ही करों के साथ टैरिफ पर निर्णय दे सकती है। संविधान निर्माताओं ने किसी भी कर को निर्धारित करने की शक्ति कार्यकारी शाखा यानी राष्ट्रपति को नहीं दी है। यह बात मुख्य न्यायाधीश जाॅन रोबर्टस ने अपने फैसले में लिखा है।
अमेरिकी संविधान के विशेषज्ञ मानते हैं कि कानून के शासन में सुप्रीम कोर्ट खड़ा है। हां, राष्ट्रपति शक्तिशाली है, पर उससे भी ज्यादा शक्तिशाली हमारा संविधान है। कांग्रेस ही अमेरिकी नागरिकों के करों का निर्धारण कर सकती हे। अमेरिकी अर्थशास्त्री ने एक गणना में कहा कि 175 अरब डालर का रिफंड, जो टैरिफ से लिया है, उसे अमेरिकी सरकार को वापस करना होगा, क्योंकि वह अनुचित ढ़ंग से लिया गया है। कोर्ट ने तो यहां तक कहा है कि आपातकालीन टैरिफ लगाना है, तो उसे 150 दिन का ही 15 प्रतिशत के हिसाब से लगा सकते हैं। यह भी मजे की बात है भारत पर पहलंे 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया, फिर उसे 50 प्रतिशत का किया और यह भी धमकी दी कि इसे 200 तक कर सकते हैं। इस तरह से मनमानी के दौर में सभी देशों की अर्थ व्यवस्था तक हिलाने का काम अमेरिकी सरकार ने किया है।
इस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ट्रंप की हवाई उड़ान को जमीन पर लाने का काम कर रहा है।
-भगवती प्रसाद डोभाल
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