Uttar pradesh News: मुज़फ्फरनगर से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने न सिर्फ एक परिवार बल्कि पूरे इलाके को भावुक कर दिया। उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान एक परिवार को 29 साल बाद अपना खोया हुआ सदस्य वापस मिल गया। जिन चाचा शरीफ को परिजन वर्षों पहले मृत मान चुके थे, वे अचानक अपने पुराने घर के दरवाज़े पर खड़े मिले।
Uttar pradesh News: 1997 में टूटा रिश्ता, फिर वर्षों तक कोई खबर नहीं
यह मामला मुज़फ्फरनगर के खतौली कस्बे के मोहल्ला बालक राम का है। यहां रहने वाले चाचा शरीफ की पहली पत्नी के निधन के बाद उन्होंने वर्ष 1997 में दूसरी शादी की और पश्चिम बंगाल चले गए। शुरुआत में परिवार से संपर्क बना रहा, लेकिन समय के साथ पता बदल गया और बातचीत पूरी तरह बंद हो गई।परिजनों ने उन्हें खोजने की हर संभव कोशिश की, लेकिन जब वर्षों तक कोई सुराग नहीं मिला तो धीरे-धीरे उम्मीद भी खत्म हो गई। परिवार ने मान लिया कि अब चाचा शरीफ इस दुनिया में नहीं रहे।
Uttar pradesh News: SIR अभियान ने खोली 29 साल पुरानी गुत्थी
समय का पहिया तब घूमा, जब राज्य में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू हुई। दस्तावेज़ों और पहचान के मिलान के दौरान एक नाम सामने आया, जिसने प्रशासन को पुराने पते तक पहुंचा दिया। वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए जब चाचा शरीफ अपने पुराने घर पहुंचे, तो वहां मौजूद परिजन उन्हें देखकर अवाक रह गए। किसी को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि जिसे 29 साल से खो चुका माना जा रहा था, वह आंखों के सामने खड़ा है।
आंसुओं में बदली खुशी, इंतज़ार का हुआ अंत
घर के दरवाज़े पर चाचा शरीफ को देखकर परिवार की आंखें नम हो गईं। भावनाओं का सैलाब ऐसा था कि कोई कुछ बोल नहीं पा रहा था। यह सिर्फ एक व्यक्ति की वापसी नहीं थी, बल्कि तीन दशकों के दर्द, इंतज़ार और अधूरी उम्मीदों का अंत था।
Uttar pradesh News: SIR बना परिवारों को जोड़ने का माध्यम
यह घटना बताती है कि SIR अभियान केवल वोटर लिस्ट सुधारने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कई बिछड़े रिश्तों को भी जोड़ने का काम कर रहा है। मुज़फ्फरनगर की यह कहानी प्रशासनिक प्रक्रिया के मानवीय पहलू को भी सामने लाती है।
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