Uttar Pradesh: उत्तर प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या, मेरठ और मिर्जापुर के जिला न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद शुक्रवार को पूरे प्रदेश में हड़कंप मच गया। सभी स्थानों पर यह धमकी सरकारी ई-मेल आईडी पर भेजी गई थी। जैसे ही ई-मेल की जानकारी प्रशासन को मिली, तत्काल सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हो गईं और पांचों कोर्ट परिसरों को एहतियातन खाली करा लिया गया।कोर्ट की नियमित कार्यवाही को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया। जज, वकील, कर्मचारी और वादकारी सभी को सुरक्षित बाहर निकाला गया। कई जगहों पर अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला।
काशी में सबसे ज्यादा असर
वाराणसी के जिला न्यायालय परिसर में अचानक मिली इस सूचना के बाद लगभग 3 हजार से अधिक अधिवक्ताओं और करीब 5 हजार वादकारियों को तुरंत बाहर निकाल दिया गया। जिला जज सहित सभी न्यायिक अधिकारी भी सुरक्षा कारणों से परिसर से बाहर आ गए।कोर्ट परिसर के भीतर मौजूद हर कक्ष, रिकॉर्ड रूम, बार एसोसिएशन भवन और पार्किंग क्षेत्र की गहन तलाशी ली गई। बम निरोधक दस्ता और डॉग स्क्वॉड की टीमों ने घंटों तक जांच की। हालांकि देर शाम तक किसी भी संदिग्ध वस्तु की पुष्टि नहीं हुई।
Uttar Pradesh: लखनऊ में डीसीपी के नेतृत्व में सघन जांच
राजधानी लखनऊ में भी ई-मेल के जरिए धमकी मिलने की सूचना के बाद पुलिस प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया। डीसीपी पश्चिम के नेतृत्व में भारी पुलिस बल कोर्ट परिसर पहुंचा।
कोर्ट के अंदर और बाहर आने-जाने वाले सभी रास्तों की घेराबंदी कर दी गई। किसी भी व्यक्ति को बिना जांच के अंदर प्रवेश नहीं दिया गया। बम निरोधक दस्ते ने मेटल डिटेक्टर और अन्य उपकरणों की सहायता से परिसर की गहन तलाशी ली। पार्किंग में खड़ी गाड़ियों की भी एक-एक कर जांच की गई।
Uttar Pradesh: अयोध्या, मेरठ और मिर्जापुर में भी अलर्ट :
अयोध्या, मेरठ और मिर्जापुर में भी लगभग एक जैसे पैटर्न का ई-मेल मिलने की पुष्टि हुई है। तीनों स्थानों पर भी न्यायालय परिसरों को खाली कराकर तलाशी अभियान चलाया गया।
मेरठ में पुलिस ने आसपास के बाजार क्षेत्रों में भी अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की। अयोध्या में संवेदनशीलता को देखते हुए अतिरिक्त फोर्स बुलाया गया। मिर्जापुर में स्थानीय पुलिस के साथ खुफिया विभाग की टीमें भी सक्रिय रहीं।
Uttar Pradesh: ई-मेल का पैटर्न एक जैसा
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पांचों शहरों को भेजे गए ई-मेल का कंटेंट लगभग एक जैसा है। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि किसी संगठित साजिश के तहत एक साथ धमकी दी गई है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि ई-मेल किस सर्वर से भेजा गया और इसके पीछे कौन लोग हैं। साइबर सेल ई-मेल के आईपी एड्रेस और डिजिटल फुटप्रिंट खंगालने में जुटी है। तकनीकी विशेषज्ञ मेल की हेडर डिटेल्स की जांच कर रहे हैं ताकि प्रेषक की पहचान हो सके।
Uttar Pradesh: ATS और STF भी जांच में शामिल :
मामले की गंभीरता को देखते हुए आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को भी जांच में शामिल किया गया है। उच्च अधिकारियों के निर्देश पर इन एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं और स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया। सूत्रों के अनुसार, लखनऊ स्थित मुख्यालय से वरिष्ठ अधिकारी पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस संभावना की भी जांच कर रही हैं कि कहीं यह किसी बड़े नेटवर्क की ओर से प्रदेश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश तो नहीं।
2007 की घटना ने बढ़ाई सतर्कता :
वाराणसी कोर्ट परिसर में 23 नवंबर 2007 को हुए बम विस्फोट की घटना आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। उस हमले में 3 वकीलों समेत 9 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब 50 लोग घायल हुए थे।
इसी पृष्ठभूमि को देखते हुए इस बार पुलिस किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरतना चाहती। अधिकारियों का कहना है कि भले ही अभी तक किसी विस्फोटक सामग्री का पता नहीं चला है, लेकिन खतरे को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता।
Uttar Pradesh:साइबर एंगल पर फोकस :
सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या ई-मेल किसी फर्जी आईडी से भेजा गया है या किसी विदेशी सर्वर का इस्तेमाल किया गया है। डिजिटल फॉरेंसिक टीमों को भी अलर्ट कर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के ई-मेल अक्सर डर और भ्रम फैलाने के उद्देश्य से भेजे जाते हैं। कई मामलों में यह “हॉक्स कॉल” भी साबित होते हैं, लेकिन संवेदनशील स्थानों के संदर्भ में हर सूचना को गंभीरता से लेना आवश्यक होता है। घटना के बाद प्रदेश के अन्य जिलों में भी न्यायालय परिसरों की सुरक्षा की समीक्षा शुरू कर दी गई है।
Writer: Raksha Raval
ये भी पढ़े: शिक्षक का काला खेल उजागर: पढ़ाई के बहाने मासूम की जिंदगी बर्बाद, सच सामने आते ही मचा हड़कंप






