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रंग लगा तो कट्टरपंथियों ने कर दी हत्या, गंगा अपमान पर डरे हिंदुओं ने लिया क़ानून का सहारा

दो घटनाओं ने दिखाया कि एक मामले में हिंसा हुई, जबकि दूसरे में कानून का सहारा लिया गया। इससे समाज में न्याय, धर्म और व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई।
दो घटनाएं, अलग प्रतिक्रियाएं

Varanasi News: देश की दो ऐसी घटनाऐं जो दो धर्मों की मानसिकता को दर्शाती हैं। एक तरफ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचने पर हत्या कर दी जाती है। दूसरी तरफ भावनाओं का अपमान करने पर क़ानून का सहारा लिया जाता है। यह दो मामले देश की सेक्युलर प्रजाति की आँखें खोलने के लिए प्रर्याप्त हैं। और देश की क़ानून व्यवस्था पर किसको कितना भरोसा है और कौन कितना क़ानून को मानता है यह भी इन घटनाओं से साफ़ होता है।

होली विवाद में युवक की हत्या

होली के दिन दिल्ली के उत्तम नगर निवासी तरुण हिंदू को कट्टरपंथियों की भीड़ इसलिए घेरकर मारती है कि गलती से हिंदू परिवार की बच्ची से रंग का ग़ुब्बारा राह चलती बुर्काधारी पर लग जाता है। और उसकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँच जाती है। जिसका बदला कानून को दरकिनार कर मज़हबी कट्टरपंथियों की भीड़ ख़ुद हिंदू की हिंदू की हत्या कर देती है।

Varanasi News दो घटनाएं, अलग प्रतिक्रियाएं
दो घटनाएं, अलग प्रतिक्रियाएं

वहीं दूसरी तरफ़ उत्तर प्रदेश के वाराणसी में इफ़्तार पार्टी मनाने के लिए मुस्लिम गंगा पर जाते हैं और नाव में बैठकर मांस की बिरयानी खाते हैं और उन हड्डियों को गंगा में फेंक देते हैं। और यह सब जानबूझकर इसलिए किया जाता है कि इस देश की बुज़दिल क़ौम जिसको हिंदू कहते हैं। उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई जा सके। उसके बाद हिंदू समाज क़ानून का सहारा लेता है और आरोपी गिरफ्तार होते हैं।

Varanasi News: पुलिस कार्रवाई पर सियासी तकरार

हिंदुओं के लिए आँखें बंद करने वाले अखिलेश यादव मुस्लिमों के पक्ष में खुलकर करते हैं बयानबाज़ी

एक धर्म की भावनाओं को ठेस पहुँचती है तो सिर तन से जुदा कर दिया जाता है, नारा-ए-तकबीर जैसे मज़हबी नारे लगते हैं। और इस देश के नेता भी चुप्पी साध लेते हैं। वहीं जब हिंदुओं की भावनओं को ठेस पहुँचती है और योगी की यूपी पुलिस उन पर क़ानूनी कार्रवाई करती है तो समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि क्या गंगा में रोजा इफ्तार नहीं कर सकते? डीएम, एसपी और एसओ को इफ्तारी देनी चाहिए थी। हथेली गरम तो पुलिस नरम। उन लोगों ने हथेली गरम नहीं की होगी, इसीलिए कार्रवाई हुई। अखिलेश यादव को यहाँ हिंदुओं की भावनाएँ नहीं दिखाई दीं यहाँ भी उनका राजनितिक चेहरा दिखाई दिया। जबकि यही अखिलेश तरुण हत्याकांड पर आँख-कान दोनों मूँद लेते हैं।

लेखक: रोहित अत्री

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