Venezuela Oil Crisis: दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला में तेल उत्पादन बेहद कम बना हुआ है। तकनीकी विशेषज्ञता की कमी, निवेश अभाव, राजनीतिक हस्तक्षेप, खराब प्रबंधन, भ्रष्टाचार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध इसके प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इन चुनौतियों के चलते वेनेजुएला अपने विशाल तेल भंडार का प्रभावी उपयोग नहीं कर पा रहा है।
अमेरिका-वेनेजुएला घटनाक्रम से बढ़ी अनिश्चितता
नए साल की शुरुआत में अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में की गई सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो व उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता की आशंका जताई जा रही है। पीएल कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक, मादुरो के लंबे शासनकाल में लिए गए अध्यादेश आधारित फैसलों ने देश की ऊर्जा व्यवस्था को कमजोर किया।
Venezuela Oil Crisis: दुनिया में सबसे बड़ा तेल भंडार, फिर भी उत्पादन कम
रिसर्च एनालिस्ट स्वर्णेंदु भूषण के अनुसार, वेनेजुएला के पास करीब 303.8 अरब बैरल तेल भंडार है, जो सऊदी अरब से भी अधिक है। इसके बावजूद नवंबर 2025 में देश का उत्पादन केवल 10 लाख बैरल प्रतिदिन रहा। तुलना करें तो अमेरिका में रोजाना लगभग 1.37 करोड़ बैरल और सऊदी अरब में 97 लाख बैरल तेल का उत्पादन होता है।
उत्पादन सुधार में लग सकते हैं 3 से 6 महीने
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि वेनेजुएला में तेल उत्पादन को तेजी से बढ़ाने का कोई त्वरित समाधान नहीं है। शुरुआती सुधार के संकेत दिखने में भी कम से कम तीन से छह महीने लग सकते हैं। इस दौरान वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव संभव है।
भारतीय तेल कंपनियों के लिए अवसर
ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 60 डॉलर प्रति बैरल रहने से भारत की तेल खोज और उत्पादन कंपनियों ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को फायदा मिल सकता है। वहीं तेल विपणन कंपनियां कम कीमतों के कारण मुनाफा बनाए रख सकती हैं। हालांकि रिपोर्ट में पेट्रोल-डीजल पर टैक्स बढ़ने की आशंका जताते हुए निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह भी दी गई है।
ये भी पढ़े… बांग्लादेश में 44 साल की हिंदू विधवा से गैंगरेप, आरोपी गिरफ्तार







