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मतदाता सूची मामले में चुनाव आयोग का फैसला, पश्चिम बंगाल राज्य सरकार की अपील खारिज

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से जुड़ी कथित गड़बड़ी के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। आयोग ने दो विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े चार चुनावी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के पहले दिए गए आदेश को बरकरार रखा है। इस फैसले के बाद राज्य प्रशासन को आगे की कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
मतदाता सूची विवाद पर आयोग सख्त

Voter list controversy: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने पश्चिम बंगाल सरकार की अपील को ठुकरा दिया है। राज्य सरकार ने आयोग से अनुरोध किया था कि दो विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची से जुड़े मामले में चार अधिकारियों के निलंबन आदेश को वापस ले लिया जाए। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने मतदाता सूची में फर्जी या मौजूद न रहने वाले लोगों के नाम गलत तरीके से जोड़े थे।

चार चुनावी अधिकारियों पर FIR का रास्ता साफ

चुनाव आयोग ने नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय से पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय को साफ़ निर्देश दिए हैं कि पहले से जारी आदेश के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट इन चारों अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाएं। सीईओ कार्यालय के एक वरिष्ठ सूत्र ने इस बात की पुष्टि की है।

जिन अधिकारियों पर कार्रवाई होनी है, उनमें दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर पूर्व विधानसभा क्षेत्र के चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ERO) देबोत्तम दत्ता चौधरी और सहायक चुनावी पंजीकरण अधिकारी (AERO) तथागत मंडल शामिल हैं। इसके अलावा, पूर्वी मिदनापुर जिले के मोयना विधानसभा क्षेत्र के ERO बिप्लब सरकार और AERO सुदीप्त दास भी इस मामले में आरोपी हैं।

Voter list controversy: मतदाता सूची विवाद पर आयोग सख्त
मतदाता सूची विवाद पर आयोग सख्त

Voter list controversy: राज्य सरकार की अपील को नहीं मिली राहत

पिछले साल अगस्त महीने में चुनाव आयोग ने इन चारों अधिकारियों को निलंबित करने और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था। साथ ही, एक संविदा पर काम कर रहे डेटा एंट्री ऑपरेटर को भी ड्यूटी से हटा दिया गया था। हालांकि, राज्य सरकार ने इस आदेश को पूरी तरह लागू नहीं किया। अधिकारियों को तो निलंबित कर दिया गया, लेकिन एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई।

इस फैसले पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने आयोग पर भाजपा के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया था और यह भी कहा था कि उनकी सरकार अपने कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करेगी।

जिला प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश

इस महीने की शुरुआत में चुनाव आयोग ने एक बार फिर दक्षिण 24 परगना और पूर्वी मिदनापुर के जिला मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिया कि चारों चुनावी अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। लेकिन इससे पहले कि आगे की प्रक्रिया शुरू होती, पश्चिम बंगाल सरकार ने शुक्रवार को सीईओ कार्यालय के माध्यम से चुनाव आयोग को एक आधिकारिक पत्र भेजा। इसमें सरकार ने इन अधिकारियों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेने की मांग दोहराई थी, जिसे अब चुनाव आयोग ने खारिज कर दिया है।

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