war effect: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रही जंग का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की ज़िंदगी पर साफ दिखने लगा है। कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने से कई सेक्टर पर दबाव बढ़ गया है, खासकर मेडिकल और व्यापार जगत में। हालात ऐसे हैं कि इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजें से लेकर खाने-पीने तक सब कुछ महंगा होने लगा है।
इंजेक्शन से BP मशीन तक महंगी
दिल्ली के बड़े दवा और मेडिकल उपकरण बाजारों में व्यापारियों के बीच चिंता का माहौल है। व्यापार से जुड़े लोगों के मुताबिक इंजेक्शन की सुई, थर्मामीटर और बीपी मॉनिटर जैसी जरूरी चीजों की थोक कीमतों में 5% से लेकर 20% तक का इजाफा हो चुका है। हालांकि अभी इसका पूरा असर आम ग्राहकों तक नहीं पहुंचा है, लेकिन आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं।
war effect: फिलहाल थोक बाजार पर असर
मेडिकल उपकरणों की कीमत बढ़ने की सबसे बड़ी वजह प्लास्टिक है। इन उपकरणों और दवाओं की पैकेजिंग में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है। युद्ध शुरू होने के बाद से प्लास्टिक के कच्चे माल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे थर्मामीटर, सिरिंज और अन्य उपकरण महंगे हो रहे हैं। अभी यह दबाव ज्यादा थोक व्यापारियों पर है, लेकिन हालात बिगड़े तो खुदरा बाजार भी प्रभावित होगा।
war effect: आम दवाओं की कीमतों में उछाल
पश्चिम एशिया के संकट का असर दवाओं पर भी साफ नजर आ रहा है। पैरासिटामोल जैसे आम दवाओं के कच्चे माल की कीमत करीब 47% तक बढ़ चुकी है। इसके अलावा डाइक्लोफेनेक, अमॉक्सिसिलिन और सिप्रोफ्लॉक्सासिन जैसी दवाओं के रॉ मटेरियल में भी 30% से 60% तक की तेजी आई है। इसका मतलब आने वाले समय में दवाएं और महंगी हो सकती हैं।
ड्राई फ्रूट्स और ऑटो पार्ट्स भी महंगे
इस जंग का असर सिर्फ मेडिकल सेक्टर तक सीमित नहीं है। ईरान से आने वाले पिस्ता, किशमिश, अंजीर, खजूर जैसे ड्राई फ्रूट्स के दाम 30% से 40% तक बढ़ गए हैं। वहीं ऑटो पार्ट्स, केमिकल और मैन्युफैक्चरिंग में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल भी महंगे हो गए हैं, जिससे कई इंडस्ट्री की लागत बढ़ रही है।
व्यापारियों को भारी नुकसान का खतरा
war effect: सप्लाई चेन में आई रुकावट ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। दुबई के रास्ते पश्चिम एशिया और यूरोप में होने वाला निर्यात भी प्रभावित हो रहा है। दिल्ली के प्रमुख बाजारों चांदनी चौक, खारी बावली, भागीरथ प्लेस, कश्मीरी गेट और सदर बाजार के व्यापारियों को डर है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो 5000 करोड़ रुपये से ज्यादा का व्यापार प्रभावित हो सकता है।
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