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भागीरथपुरा जल संकट: 10 हजार जांच, 2500 घरों का सर्वे, फिर भी नए मरीज-लिकेज अब भी रहस्य,जांच और सर्वे के बाद भी हालात बेकाबू

भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली बीमारी को लेकर प्रशासनिक दावों के बावजूद स्थिति अब भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सकी है। अब तक 10 हजार से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच और करीब 2500 घरों का सर्वे किया जा चुका है

Water Crisis: भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से फैली बीमारी को लेकर प्रशासनिक दावों के बावजूद स्थिति अब भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ सकी है। अब तक 10 हजार से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच और करीब 2500 घरों का सर्वे किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद नए मरीज सामने आ रहे हैं। सबसे गंभीर चिंता यह है कि बीमारी की जड़ बने पानी के लिकेज की असली वजह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है।

मौतों के आंकड़ों पर विरोधाभास

गैर-आधिकारिक सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में अब तक 17 मौतों की खबरें सामने आई हैं, जबकि प्रशासन केवल 5 मौतों की ही पुष्टि कर रहा है। मौतों के आंकड़ों को लेकर यह विरोधाभास स्थिति की गंभीरता पर सवाल खड़े कर रहा है।

Water Crisis: जीबीएस की खबरें गलत, विशेषज्ञों की पुष्टि

हाल ही में गुइलेन बैरे सिंड्रोम (GBS) के मरीज मिलने की खबरें सामने आई थीं, लेकिन प्रशासन और विशेषज्ञों ने इन दावों को खारिज कर दिया है। कोलकाता से आई आईसीएमआर टीम सहित अन्य वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि इंदौर में जीबीएस का एक भी केस सामने नहीं आया है।

घरों के हौज की सफाई और क्लोरिनेशन शुरू

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग ने सभी बोरिंगों की टेस्टिंग के साथ-साथ घरों में बने हौज (पानी की टंकियों) की सफाई और क्लोरिनेशन का काम शुरू कर दिया है। फिलहाल निगम के टैंकरों से ही पीने के पानी की आपूर्ति की जा रही है।

अब भी साफ नहीं, दूषित पानी कैसे फैला

नगर निगम अब तक आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि आखिर किस तरह का लिकेज या किस स्रोत का दूषित पानी बीमारी का कारण बना। इसी अनिश्चितता के चलते क्षेत्र में भय और असंतोष का माहौल बना हुआ है।

Water Crisis: आयुष विभाग भी सक्रिय, आयुर्वेदिक दवाओं का वितरण

स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ आयुष विभाग भी सक्रिय हो गया है। शासकीय अष्टांग आयुर्वेदिक कॉलेज के चिकित्सकों द्वारा शिविर लगाकर नागरिकों को आयुर्वेदिक औषधियां वितरित की जा रही हैं।

30 बीटों में बंटा इलाका, सख्त निगरानी

प्रशासन ने पूरे भागीरथपुरा क्षेत्र को 30 से अधिक बीटों में विभाजित किया है। सभी बोरिंगों का क्लोरिनेशन किया जाएगा और बेसमेंट में बने हौज की सफाई के बाद ही पानी उपयोग की अनुमति दी जाएगी। नागरिकों से भी इस प्रक्रिया में सहयोग की अपील की गई है।

उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में विशेषज्ञ मौजूद

इस संबंध में आयोजित समीक्षा बैठक में अपर कलेक्टर नवजीवन पंवार, कोलकाता से आई टीम के वैज्ञानिक डॉ. प्रमित घोष, डॉ. गौतम चौधरी, दिल्ली के एनसीडीसी के डॉ. अनुभव, सीएमएचओ डॉ. माधव प्रसाद हसानी सहित कई वरिष्ठ चिकित्सक और अधिकारी मौजूद रहे। प्रशासनिक कवायद तेज होने के बावजूद बीमारी का सिलसिला पूरी तरह थमता नजर नहीं आ रहा है। लगातार सामने आ रहे नए मामलों के चलते भागीरथपुरा की स्थिति अब भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है

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