West bengal: प्रशासनिक प्रक्रिया की सख्ती के बीच एक बार फिर मानवीय संकट की तस्वीर सामने आई है। उम्रजनित बीमारी के कारण लगातार पांच दिन अस्पताल में भर्ती रहने के बाद छुट्टी मिलते ही 75 वर्षीय वृद्धा मनोआरा बीबी को एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) की सुनवाई में उपस्थित होना पड़ा। यह दृश्य मंगलवार को मुर्शिदाबाद के बरहामपुर नहीं, बल्कि बरांई (बरंजा/बड़ाञा) ब्लॉक के डाकबंगला कृषक बाजार स्थित हियरिंग सेंटर में देखने को मिला।
कमजोर हालत में सुनवाई के लिए मजबूरी
मनोआरा बीबी का घर बरांई ब्लॉक के बैद्यनाथपुर गांव में है। परिवार के अनुसार, शारीरिक स्थिति अत्यंत कमजोर होने के बावजूद प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने के लिए उन्हें सुनवाई में आना पड़ा। उनके पोते और बेटे उन्हें वाहन से लेकर केंद्र पहुंचे, लेकिन लंबा रास्ता, भीड़ और घंटों इंतजार के कारण वृद्धा के साथ-साथ पूरा परिवार भारी परेशानी में पड़ गया।
West bengal: 104 वर्षीय बुजुर्ग को भी नहीं मिली राहत
इसी हियरिंग सेंटर पर एक और दिल दहला देने वाला दृश्य देखने को मिला। 104 वर्षीय बुजुर्ग हारु शेख को भी एसआईआर की सुनवाई में उपस्थित होना पड़ा। चलने-फिरने में असमर्थ लगभग शताब्दी पार कर चुके इस बुजुर्ग को उनके बेटे टोटो (ई-रिक्शा) से केंद्र तक लाए। लंबा इंतजार और शारीरिक थकावट उनके लिए भी असहनीय हो गई, ऐसा परिजनों का आरोप है।
West bengal: प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल
इन दोनों घटनाओं ने प्रशासनिक व्यवस्था के मानवीय पक्ष पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आम लोगों के मन में अब यह प्रश्न उठ रहा है कि वृद्ध, अस्वस्थ और चलने-फिरने में अक्षम नागरिकों के लिए क्या घर बैठे या विशेष व्यवस्था के तहत सुनवाई की सुविधा नहीं दी जा सकती थी?
बुजुर्गों की पीड़ा की मार्मिक तस्वीर
West bengal: मनोआरा बीबी और हारु शेख के अनुभव बरांई ब्लॉक में चल रही एसआईआर हियरिंग प्रक्रिया के दौरान बुजुर्गों की पीड़ा की एक मार्मिक तस्वीर पेश करते हैं।
यह भी पढ़ें: मकर संक्रांति से पहले गंगासागर में सुकांत मजूमदार का स्नान, राज्य सरकार पर लगाए गंभीर आरोप







