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पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव, क्या ममता बनर्जी दोहराएंगी 2021 की जीत? या चलेगा मोदी का जादू

West Bengal Elections 2026: पश्चिम बंगाल की राजनीति में ममता बनर्जी की रणनीति का सबसे बड़ा आधार उनकी वेलफेयर योजनाएं रही हैं। ‘स्वास्थ्य साथी’ के जरिए मुफ्त स्वास्थ्य बीमा, ‘द्वारे सरकार’ के तहत घर-घर योजनाओं का लाभ और कोरोना काल में मुफ्त राशन वितरण जैसे कदमों ने लाखों गरीब और ग्रामीण परिवारों तक सीधा असर डाला। इन योजनाओं का खास फायदा महिलाओं को मिला, जिससे महिला वोट बैंक में टीएमसी की मजबूत पकड़ बनी।

बंगाली अस्मिता बनाम ‘बाहरी’ राजनीति

अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने लगातार ‘बंगाली अस्मिता’ को चुनावी मुद्दा बनाया है। ममता बनर्जी खुद को “बंगाल की बेटी” के रूप में पेश करती रही हैं। वहीं भाजपा पर बाहरी पार्टी होने का आरोप लगाया गया। यह नैरेटिव खासकर दक्षिण बंगाल में टीएमसी के पक्ष में जाता दिखा।

West Bengal Elections 2026: विपक्ष की कमजोरी भी बना कारण

राज्य में लेफ्ट और कांग्रेस का गठबंधन मजबूत चुनौती पेश नहीं कर पाया। उनका वोट शेयर लगातार घटा, जिसका सीधा फायदा टीएमसी को मिला।

बीजेपी के लिए क्या सबक?

बीजेपी ने 2021 में बड़ी छलांग लगाते हुए 3 से 77 सीटों तक पहुंच बनाई, लेकिन सरकार नहीं बना सकी। पार्टी को राज्य स्तर पर मजबूत चेहरा नहीं मिल पाया और वह काफी हद तक केंद्र नेतृत्व पर निर्भर रही। हालांकि नॉर्थ बंगाल और जंगलमहल जैसे इलाकों में बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर रहा, लेकिन दक्षिण बंगाल में टीएमसी का दबदबा कायम रहा।

West Bengal Elections 2026: 2026 में नई रणनीति और नए मुद्दे

2026 के चुनाव को देखते हुए ममता बनर्जी फिर से स्थानीय मुद्दों, महिला वोट और वेलफेयर योजनाओं पर फोकस कर रही हैं। इसके साथ ही एसआईआर  (मतदाता सूची पुनरीक्षण) का मुद्दा भी गर्म है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जहां घुसपैठियों का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं ममता बनर्जी आरोप लगा रही हैं कि वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। उनका दावा है कि एक करोड़ से ज्यादा वोटर प्रभावित हो सकते हैं, हालांकि चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज किया है।

2026: क्या दोहराएगा 2021 का इतिहास?

2021 में ममता बनर्जी ने बीजेपी की लहर को रोकते हुए लगातार तीसरी बार सरकार बनाई थी। यह जीत टीएमसी के लिए मजबूत जनादेश साबित हुई। अब 2026 में मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। एक ओर ममता की योजनाएं और बंगाली अस्मिता का मुद्दा है, तो दूसरी ओर बीजेपी संगठन को मजबूत कर रही है और सीएए-एनआरसी जैसे मुद्दों को फिर से उठा सकती है।

नजरें अप्रैल के चुनाव पर

चुनाव नजदीक हैं और सियासी माहौल गरमा रहा है। सवाल यही है क्या ममता बनर्जी एक बार फिर जीत का इतिहास दोहराएंगी या बीजेपी इस बार बंगाल में नई लहर बना पाएगी? अप्रैल में होने वाले मतदान पर पूरे देश की नजरें टिकी हैं।

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