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West Bengal News: मालदा पुलिस ने सुवेंदु अधिकारी को जांच के लिए समन जारी किया

मालदा पुलिस ने नेता प्रतिपक्ष और भाजपा के सुवेंदु अधिकारी को एफआईआर के आधार पर 7 दिन में पेश होने के लिए नोटिस जारी किया। यह मामला बीएनएसएस 2023 की धारा 35(3) के तहत दर्ज किया गया है। एफआईआर पूर्व आईपीएस अधिकारी और टीएमसी नेता प्रसून बनर्जी की शिकायत पर आधारित है, जिसमें अधिकारियों के खिलाफ अपमानजनक और अनुचित टिप्पणियां शामिल हैं।
सुवेंदु अधिकारी को मालदा पुलिस का नोटिस

West Bengal News: पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के चंचल पुलिस स्टेशन ने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। यह नोटिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा 35 के उप-धारा (3) के तहत भेजा गया है।

एफआईआर के पीछे की कहानी

एफआईआर 2 जनवरी 2026 को दर्ज की गई थी। यह केस भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 192, 196, 299, 302, 352 और 356 के तहत दर्ज है। ये धाराएं मुख्य रूप से अपमानजनक बयान, धमकी, मानहानि और अन्य संबंधित अपराधों से जुड़ी हैं।

नोटिस में कहा गया है कि जांच के दौरान तथ्यों और परिस्थितियों का पता लगाने और पारदर्शी तरीके से पूछताछ करने के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। इसलिए, सुवेंदु अधिकारी को 7 दिनों के अंदर चंचल पुलिस स्टेशन में पेश होने का निर्देश दिया गया है।

West Bengal News: सुवेंदु अधिकारी को मालदा पुलिस का नोटिस
सुवेंदु अधिकारी को मालदा पुलिस का नोटिस

West Bengal News: प्रसून बनर्जी की शिकायत का खुलासा

यह एफआईआर पूर्व आईपीएस अधिकारी और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के जिला नेता प्रसून बनर्जी की शिकायत पर दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, 2026 की शुरुआत में मालदा के चंचल में भाजपा की एक जनसभा के दौरान सुवेंदु अधिकारी ने प्रसून बनर्जी के खिलाफ अपमानजनक और कुरुचिपूर्ण टिप्पणियां कीं। बनर्जी ने इसे व्यक्तिगत हमला और सम्मानहानि बताया, जिसके बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं ने भी विरोध प्रदर्शन किया और थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।

संपूर्ण जांच और आगे की कार्रवाई

पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एफआईआर दर्ज की और अब जांच आगे बढ़ाने के लिए नोटिस जारी किया है। बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत जब गिरफ्तारी की तत्काल आवश्यकता न हो, तो पुलिस आरोपी या संदिग्ध व्यक्ति को नोटिस देकर पेश होने का निर्देश दे सकती है। यदि व्यक्ति नोटिस का पालन करता है, तो सामान्यतः गिरफ्तारी से बचा जा सकता है, लेकिन जांच में सहयोग न करने पर आगे कार्रवाई हो सकती है।

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