West Bengal SIR Case: सुप्रीम कोर्ट बुधवार को पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इन याचिकाओं में एक याचिका मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दायर की गई है। उन्होंने इसमें भारत निर्वाचन आयोग पर राजनीतिक पक्षपात करने और पुनरीक्षण प्रक्रिया में मनमानी अपनाने का आरोप लगाया है।
चुनाव आयोग पर राजनीतिक आरोप
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर जारी कार्यसूची के अनुसार, इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली भी शामिल होंगे।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी याचिका में इस पुनरीक्षण प्रक्रिया की कानूनी वैधता पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि जिस तरीके से यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है, उससे लाखों मतदाताओं, खासकर हाशिए पर रहने वाले वर्गों, का मतदान का अधिकार छिन सकता है।
याचिका में उन्होंने चुनाव आयोग पर राजनीतिक मंशा से काम करने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि एक संवैधानिक संस्था, जिससे निष्पक्षता और लोकतंत्र की रक्षा की उम्मीद की जाती है, वह ऐसी स्थिति में पहुंच गई है जो किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

West Bengal SIR Case: तृणमूल नेताओं की याचिकाएं भी सूचीबद्ध
ममता बनर्जी ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है और चुनाव आयोग को उचित दिशा-निर्देश जारी करने की अपील की है।
इससे पहले, तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा, राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन और डोला सेन भी पश्चिम बंगाल में चल रही इस प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे। उनकी याचिकाएं भी मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की गई हैं।
यह मामला इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि सोमवार को ममता बनर्जी ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग मुख्यालय जाकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की थी और इस प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक टकराव
इस बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर कड़े आरोप लगाए। उन्होंने उन्हें घमंडी बताते हुए कहा था कि चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी के दबाव में आकर पश्चिम बंगाल को निशाना बना रहा है।
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया था कि ड्राफ्ट मतदाता सूची से बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि इस पुनरीक्षण प्रक्रिया की निगरानी के लिए विशेष चुनावी पर्यवेक्षक और माइक्रो-पर्यवेक्षक केवल पश्चिम बंगाल के लिए नियुक्त किए गए हैं, जो अपने आप में सवाल खड़े करता है।







