Women Officers Pension: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाया है कि आर्मी, नेवी और एयर फोर्स में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) से सेवा करने वाली महिलाओं को अब पूरी पेंशन मिलेगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उन्हें स्थायी कमीशन (Permanent Commission) न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं थी, बल्कि यह प्रणालीगत भेदभाव का परिणाम था।

महिला अफसरों की 20 साल सेवा मान्य
जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जवल भुईयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि अब यह मान लिया जाएगा कि महिला SSC अफसरों ने पेंशन पाने के लिए आवश्यक 20 साल की सेवा पूरी कर ली है, भले ही उन्हें पहले सेवा से हटा दिया गया हो।
यह फैसला सुचेता एडन समेत अन्य महिला अफसरों की याचिकाओं पर आया है, जिसमें केंद्र की 2019 की परमानेंट कमीशन नीति और आर्म्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल (AFT) के फैसलों को चुनौती दी गई थी।
Women Officers Pension: सुप्रीम कोर्ट ने दी तीन प्रमुख राहतें
- पहले स्थायी कमीशन प्राप्त अफसरों का स्टेटस: जो SSC अफसर 2020–21 में नंबर 5 सेलेक्शन बोर्ड या AFT के फैसले के आधार पर स्थायी कमीशन पा चुकी हैं, उनका स्टेटस वैसा ही रहेगा।
- पूर्व में सेवा से बाहर हुई अफसरों के लिए: जिन्होंने केस के दौरान सेवा छोड़ दी थी, उन्हें माना जाएगा कि उन्होंने 20 साल की सेवा पूरी कर ली है। उन्हें पेंशन और संबंधित लाभ मिलेंगे, लेकिन पिछला वेतन (एरियर) नहीं मिलेगा।
- वर्तमान में सेवा में मौजूद अफसरों के लिए: उन्हें 60% कटऑफ पूरा करने पर स्थायी कमीशन मिलेगा, बशर्ते जरूरी मंजूरी प्राप्त हो।
यह आदेश JAG (जज एडवोकेट जनरल) और AEC (एजुकेशन कॉर्प्स) में कार्यरत महिलाओं पर लागू नहीं होगा, क्योंकि उन्हें 2010 से ही स्थायी कमीशन के लिए विचार किया गया।

सीजेआई ने आर्मी, नेवी और एयर फोर्स की स्थिति पर कहा
आर्मी: ACR यानी परफॉर्मेंस रिपोर्ट महिलाओं के खिलाफ पूर्वाग्रह दिखाती थीं। महिलाओं को आगे बढ़ने का मौका नहीं मिला और जरूरी ट्रेनिंग नहीं दी गई।
नेवी: यहाँ भी ACR में भेदभाव मिला, लेकिन ‘डायनेमिक वैकेंसी मॉडल’ सही है। अधिकारियों को मूल्यांकन मानदंड की पूरी जानकारी नहीं दी गई।
एयर फोर्स: न्यूनतम प्रदर्शन मानदंड जल्दी लागू किए गए। 2007 बैच को 2020-21 में आंका गया, प्रक्रिया पूरी नहीं थी। इसके बावजूद कोर्ट ने पुनर्नियुक्ति का आदेश दिया।
Women Officers Pension: फैसले पर प्रतिक्रियाएं
- वी. मोहना (सीनियर एडवोकेट): सेना में SSC महिलाओं को स्थायी कमीशन देने में यह बड़ा कदम है।
- मेनका गुरुस्वामी (सीनियर एडवोकेट): कोर्ट के फैसले के लिए धन्यवाद।
- एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी: इस फैसले पर हम आभारी हैं।
मामला 23 साल पुराना
2003 में महिला वकील बबीता पुनिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद 9 महिला अफसरों ने 2009 तक इसी मुद्दे पर याचिकाएं दायर की। 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट ने महिलाओं को स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया और प्रमोशन समेत अन्य लाभ देने को कहा।

हालांकि, 2019 में केंद्र ने नीति बनाई कि मार्च 2019 के बाद भर्ती हुई महिलाओं को ही स्थायी कमीशन मिलेगा। इससे पहले की महिलाओं को लाभ नहीं मिला, जिसके कारण यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया।
महिला अफसरों की वर्तमान स्थिति
थलसेना (Army): महिलाएं SSC के तहत आर्मी सर्विस कोर, ऑर्डनेंस, एजुकेशन कोर, JAG, इंजीनियर, सिग्नल, इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रिकल-मेकैनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच में ही काम कर सकती हैं। उन्हें कॉम्बैट सर्विसेस जैसे इन्फैंट्री और आर्मर्ड में नहीं भेजा जाता। मेडिकल और नर्सिंग सर्विसेस में स्थायी कमीशन मिलता है।
वायुसेना और नौसेना: महिलाएं स्थायी कमीशन के विकल्प के साथ फ्लाइंग और ग्राउंड ड्यूटी में काम कर सकती हैं। नौसेना में महिलाएं लॉजिस्टिक्स, कानून, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, पायलट और नेवल इंस्पेक्टर कैडर में सेवाएं देती हैं।
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