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क्या डिजिटल युग में कम हो रही है Gen Z की बौद्धिक क्षमता!

Worrying report: क्या डिजिटल युग में कम हो रही है Gen Z की बौद्धिक क्षमता!

Worrying report: दुनियाभर के न्यूरोसाइंटिस्ट्स द्वारा किए गए एक हालिया अध्ययन ने आधुनिक समाज को चिंता में डाल दिया है। शोध के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि Gen Z इतिहास की पहली ऐसी पीढ़ी बन गई है, जिसकी बौद्धिक क्षमता यानी IQ अपने से पिछली पीढ़ी, मिलेनियल्स, के मुकाबले कम आंकी गई है। पिछले एक दशक में युवाओं के मानसिक विकास के पैटर्न में जो बदलाव आए हैं, उन्होंने वैज्ञानिकों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या हम विकास के बजाय मानसिक गिरावट की ओर बढ़ रहे हैं।

Worrying report: इतिहास में पहली बार टूटा बौद्धिक विकास का क्रम

पिछले 100 वर्षों का रिकॉर्ड देखें तो यह पहली बार हुआ है कि युवा अपने माता-पिता की तुलना में IQ टेस्ट और बुनियादी कौशलों में पिछड़ रहे हैं। अब तक माना जाता था कि बेहतर सुविधाओं और तकनीक के कारण हर नई पीढ़ी अधिक स्मार्ट होगी, लेकिन वर्तमान स्थिति इसके विपरीत है। विशेष रूप से अमेरिका और यूरोप में युवाओं की याददाश्त, पढ़ने की गति और एकाग्रता में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो सीधे तौर पर उनकी समस्या-समाधान (Problem Solving) की क्षमता को प्रभावित कर रही है।

 Worrying report:
                                                                         मिलेनियल्स vs जेन-ज़ी

Worrying report: डिजिटल उपकरणों की लत और बदलता शैक्षिक परिवेश

इस गिरावट के पीछे सबसे प्रमुख कारण बचपन से ही स्क्रीन और डिजिटल डिवाइस का अत्यधिक उपयोग माना जा रहा है। शोधकर्ताओं के अनुसार, स्कूलों और सामाजिक जीवन में जिस तरह से डिजिटल गैजेट्स ने जगह बनाई है, उसने मस्तिष्क की गहराई से सोचने की प्रक्रिया को धीमा कर दिया है। घंटों सोशल मीडिया पर बिताने और छोटे वीडियो (Shorts/Reels) देखने की आदत ने युवाओं के ‘अटेंशन स्पैन’ यानी ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को न्यूनतम स्तर पर पहुँचा दिया है।

आधुनिक कौशल बनाम बुनियादी बुद्धिमत्ता

अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि Gen Z डिजिटल दुनिया के हिसाब से नए और अलग तरह के कौशल सीख रही है। हालांकि, न्यूरोसाइंटिस्ट्स का मानना है कि तकनीक चलाने की जानकारी होना और वास्तविक बुद्धिमत्ता होना दो अलग बातें हैं। डेटा स्पष्ट रूप से संकेत देता है कि भले ही आज के युवा गैजेट्स के साथ सहज हों, लेकिन जब बात जटिल तर्क और गहरी समझ की आती है, तो वे पिछली पीढ़ियों के मुकाबले कमजोर साबित हो रहे हैं। यह स्थिति आने वाले समय में कार्यक्षेत्र और सामाजिक नेतृत्व के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकती है।

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