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‘हड्डियां-खोपड़ियां ही बची’ कोलकाता के Wow Momo गोदाम अग्निकांड में 21 मौतों का जिम्मेदार कौन?

Wow! Momo

Wow! Momo: कोलकाता के दक्षिण 24 परगना ज़िले में स्थित Wow! Momo के एक अवैध गोदाम में 26 जनवरी को लगी भीषण आग में 21 निर्दोष लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 21 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। आग के बाद गोदाम पूरी तरह ध्वस्त हो गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस इमारत के पास कोई फायर सेफ्टी क्लीयरेंस नहीं था और न ही किसी तरह का सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद था।

सरकार की गंभीर लापरवाही

यह हादसा राज्य सरकार की गंभीर लापरवाही की ओर इशारा करता है। सवाल उठ रहे हैं कि बिना सुरक्षा मानकों के चल रहे इस गोदाम को अनुमति कैसे मिली। इस मामले में दोषियों के खिलाफ तत्काल और सख्त कार्रवाई की मांग तेज़ हो गई है। आग इतनी भयावह थी कि अब तक कई शवों की पहचान संभव नहीं हो सकी है। अधिकारियों के अनुसार, अधिकांश शव बुरी तरह जल चुके हैं, जिनमें केवल बड़ी हड्डियाँ और खोपड़ियाँ ही बची हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस और राहत टीमें अब मलबे से बरामद हड्डियों और खोपड़ियों की गिनती के ज़रिए मृतकों की संख्या का अनुमान लगा रही हैं।

रेस्क्यू टीम ने हाल ही में 13 और शव बरामद किए, जिसके बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 21 हो गई। पुलिस का कहना है कि 28 लोग अब भी लापता हैं, जिससे मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि हादसे की भयावहता और नुकसान को देखते हुए इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। अधिकारियों ने बताया कि बरामद 21 शवों की पहचान के लिए डीएनए जांच प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। कई शव इस कदर झुलस चुके हैं कि पारंपरिक तरीकों से उनकी पहचान संभव नहीं है, इसलिए डीएनए परीक्षण का सहारा लिया जा रहा है। राहत दल अब भी मलबे और खंडहर में तलाशी अभियान चला रहे हैं।

west bengal fire incident

Wow! Momo: शुभेंदु अधिकारी ने क्या कदम उठाया?

इस बीच, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और भाजपा के अन्य नेताओं के प्रस्तावित दौरे को देखते हुए प्रशासन ने इलाके में निषेधाज्ञा लागू कर दी है। बुधवार आधी रात से आम लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। पुलिस का कहना है कि यह फैसला कानून-व्यवस्था बनाए रखने और रेस्क्यू व शिनाख्त कार्य को निर्बाध रूप से चलाने के लिए लिया गया है। शुभेंदु अधिकारी ने घटनास्थल पर जाने और पास के एक मंदिर से मार्च निकालने की अनुमति के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया है। अदालत से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस मामले की सुनवाई जल्द ही न्यायमूर्ति शुभ्रा घोष के समक्ष हो सकती है।

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