UP SIR Controversy: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव साल 2027 में होंगे जो अभी काफी दूर है, लेकिन SIR को लेकर राजनीतिक हलचल पहले से ही काफी तेज़ हो गई है। समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दल इसे भाजपा की साजिश बता रहे हैं और चुनाव आयोग पर प्रक्रिया को जल्दबाजी में कराने का आरोप लगा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, SIR ड्यूटी में लगे अब तक 4 कर्मचारियों की मौत हो चुकी है, जिससे इस प्रक्रिया की गंभीरता और सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, गाजियाबाद में लापरवाही के लिए 21 BLO पर FIR दर्ज की गई है। इस बीच बरेली जिले से सामने आई ये खबर प्रदेश भर में चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां हिंदू से मुस्लिम बना एक शख्स SIR के लिए 40 साल बाद अपने गांव वापस लौटा है।
अब जानें पूरा मामला
दरअसल, काशीपुर निवासी वेदराम के बेटे ओमप्रकाश महज 15 साल की उम्र में घर छोड़कर दिल्ली चले गए थे और मुस्लिम धर्म अपना लिया था। जो अब सलीम नाम से जाने जाते हैं। कई साल तक जब ओमप्रकाश वापस नहीं लौटे, तो गांव वालों को लगा कि वह अब इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन SIR प्रक्रिया के तहत फॉर्म भरने के लिए वह अपने 15 साल के बेटे जुम्मन के साथ अपने मूल गांव लौट आए।
UP SIR Controversy: फूल-माला बैंड-बाजे के साथ स्वागत
गांव में उनकी पहचान सामने आते ही ग्रामीणों ने उन्हें फूल-माला, बैंड-बाजे और जुलूस के साथ स्वागत किया। ग्रामीणों का कहना था कि इतनी लंबी अवधि के बाद उनका लौटना उनके लिए चौंकाने वाला और भावुक करने वाला पल था। इसी बीच, कानपुर देहात के बीएसए अजय कुमार मिश्र ने बताया कि सभी स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है, जिन्हें मतदान केंद्र के रूप में उपयोग किया जा रहा है। अब ये विद्यालय सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक खुले रहेंगे। बीएसए ने कहा कि यह बदलाव विशेष रूप से उन स्कूलों पर लागू होगा, जहां SIR जैसे महत्वपूर्ण निर्वाचन कार्य किए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य कर्मचारियों और मतदाताओं दोनों की सुविधा सुनिश्चित करना है।
ओमप्रकाश ने अपनाया पुश्तैनी गांव
ओमप्रकाश और उनके बेटे जुम्मन का स्वागत खास अंदाज में किया गया। ग्रामीणों ने उन्हें मंदिर ले जाकर स्नान करवाया और सनातन धर्म में उनकी दोबारा घर वापसी की रस्म पूरी कराई। ओमप्रकाश ने बताया कि अब उनका लक्ष्य है कि वह अपने पुश्तैनी गांव में ही बसें और वहीं से अपना नया पहचान पत्र, आधार कार्ड और वोटर आईडी बनवाएं, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की परेशानी से बचा जा सके। उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली में उन्होंने नई जिंदगी शुरू की, शादी की और बच्चे हुए, लेकिन दिल के एक कोने में हमेशा गांव और परिवार की याद बनी रही। SIR अभियान के दौरान पहचान का सवाल उठने पर उन्हें एहसास हुआ कि उनकी असली पहचान उनके गांव और परिवार से ही जुड़ी है, और यही उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

UP SIR Controversy: लखनऊ में सपा की नई होर्डिंग
उधर, लखनऊ में सपा कार्यालय के पास नयी होर्डिंग लगाई गई है। जिसमें भाजपा पर नोटबंदी, किसान कानून, कोविड महामारी और SIR के कारण कर्मचारियों की कठिनाई को लेकर सवाल उठाए गए हैं। हॉर्डिंग पर लिखा गया है कि “SIR ड्यूटी- कर्मचारियों की मजबूरी, काम के दबाव में 10 से ज्यादा BLO की जान चली गई। ये सिर्फ आंकड़ा नहीं… हर संख्या के पीछे एक परिवार का उजड़ना है।” सपा का कहना है कि यह होर्डिंग SIR प्रक्रिया के दौरान कर्मचारियों और उनके परिवारों पर पड़ने वाले दबाव और खतरे को उजागर करने के लिए लगाई गई है।
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