BIHAR ELECTION: बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस अब संगठनात्मक सर्जरी मोड में आ गई है। चुनावी नतीजों ने जिस तरह पार्टी की जड़ों को कमजोर दिखाया है, उसके बाद कांग्रेस हाईकमान ने समीक्षा प्रक्रिया को सिर्फ औपचारिकता न रखते हुए इसे कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई से जोड़ दिया है। इसी क्रम में पटना में हुई समीक्षा बैठक में अनुपस्थित रहने पर 15 जिला अध्यक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
हार की वास्तविक वजहों का पता लगाना
पार्टी की समीक्षा बैठक का उद्देश्य हार की वास्तविक वजहों का पता लगाना, टिकट वितरण की प्रक्रिया पर सवालों का समाधान करना और बूथ स्तर तक संगठन में आई कमियों को समझना था। बैठक की अध्यक्षता प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने की, जबकि प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और वरिष्ठ नेता शकील अहमद खान भी मौजूद रहे।
BIHAR ELECTION: जमीनी स्तर पर निष्क्रियता और गुटबाजी
बैठक के दौरान कार्यकर्ताओं ने खुले मंच पर कई कड़े सवाल उठाए खासकर टिकट बंटवारे में पक्षपात, कमजोर उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया और चुनाव अभियान की कमज़ोर रणनीतियों पर। कई जिला अध्यक्षों ने इस दावे को भी खारिज किया कि हार “वोट चोरी” का परिणाम थी। उनका कहना था कि वास्तविक समस्या जमीनी स्तर पर संगठन की निष्क्रियता और गुटबाजी थी।
BIHAR ELECTION: 48 घंटे में मांगा जवाब
इसी बीच, 15 जिला अध्यक्षों के अनुपस्थित रहने पर पार्टी ने इसे अनुशासनहीनता बताते हुए गंभीरता से लिया। पार्टी सूत्रों के अनुसार बैठक की सूचना समय पर व्हाट्सऐप और व्यक्तिगत कॉल के माध्यम से भेजी गई थी। इसके बावजूद गैरहाजिरी पर पार्टी कार्यालय सचिव नलिन कुमार ने सभी को नोटिस जारी करते हुए 48 घंटे में जवाब मांगा है। पार्टी ने संकेत दिया है कि असंतोषजनक जवाब मिलने पर कार्रवाई तय है।
जिम्मेदारियों के पुनर्गठन
कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि यह कदम बिहार संगठन के पुनर्गठन का हिस्सा है, और अब जवाबदेही से कोई बच नहीं पाएगा। पार्टी का इरादा है कि 2026 की तैयारियों से पहले संगठन को मजबूत, अनुशासित और एकजुट बनाया जाए। साफ है कि कांग्रेस अब “हार की समीक्षा” से आगे निकलकर “जिम्मेदारियों के पुनर्गठन” के चरण में प्रवेश कर चुकी है।
ये खबरें भी पढ़े… Bengal News: ईडी की बड़ी रिकवरी: बंगाल फ्रॉड केस में करोड़ों की कुर्क संपत्ति बैंक को लौटाई!







