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Lakhimpur Kheri: फर्जी मर्डर केस में 11 तारीख को फैसला! जीजा या साला, कौन जाएगा जेल? खीरी की जनता को निर्णय का इंतज़ार

Lakhimpur Kheri

Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जनपद का बहुचर्चित फर्जी हत्या प्रकरण अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुका है। 11 दिसंबर 2025 को अदालत इस सनसनीखेज मामले पर अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाने वाली है। जिले भर में चर्चा है कि सच की कसौटी पर कौन खरा उतरेगा जीजा या साला?

जिंदा पत्नी को मृत दिखाकर हत्या का केस

मामला ग्राम रमपुरवा, मजरा दरियाबाद, थाना भीरा का है। 27 जून 2023 को मुस्तफा पुत्र गफूर ने अपनी पत्नी की हत्या का आरोप लगाते हुए अपने साले बरकत अली अंसारी और उसके दो बेटों के खिलाफ अदालत में केस दर्ज कराया था। जांच आगे बढ़ी तो मामला और उलझता गया। आरोप पक्ष पर यह सवाल खड़ा हुआ कि जिस महिला को मृत बताकर केस दर्ज कराया गया, वह कथित रूप से जिंदा हो सकती है। वादी के बयान और तीन गवाहों की गवाही के बाद केस और भी जटिल हो गया।

Lakhimpur Kheri: 11 दिसंबर पर टिकी जिले की निगाहें

जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी इलाकों तक इस केस पर लगातार चर्चा बनी हुई है। आम लोगों में दो ही सवाल गूंज रहे हैं क्या बरकत अली अंसारी और उनके बेटे दोषी करार दिए जाएंगे? या अदालत इसे ‘झूठा और साजिशन तैयार किया गया मामला’ मानते हुए आरोपियों को राहत देगी?

सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं

मीडिया से बातचीत में बरकत अली अंसारी ने दावा किया कि उनके खिलाफ लगाया गया आरोप पूरी तरह मनगढ़ंत है। उनका कहना था किसी की हत्या करना इंसानियत का कत्ल करने जैसा है। अगर कोई अपराधी है, तो उसे सजा जरूर मिलनी चाहिए, लेकिन हम निर्दोष हैं तो डर कैसा? सत्य मेव जयते सत्य कभी नहीं मरता। बरकत का विश्वास है कि 11 दिसंबर को अदालत उनकी बेगुनाही साबित करेगी।

Lakhimpur Kheri: वादी मुस्तफा अपने बयान पर कायम

उधर वादी मुस्तफा का कहना है कि उन्होंने अदालत में सच्चाई रख दी है और अब वे कोर्ट के फैसले का सम्मान करेंगे। उनकी पत्नी के जिंदा होने और हत्या के दावे के विरोधाभास ने इस केस को बेहद संवेदनशील बना दिया है। जनपद खीरी में इस मामले ने इतना ध्यान खींचा है कि फैसला सुनने के लिए 11 दिसंबर को अदालत में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की उम्मीद है। यह फैसला तय करेगा  क्या आरोपी जेल जाएंगे? या अदालत इस मामले को ‘मनगढ़ंत आरोप’ मानते हुए उन्हें बरी कर देगी?

अंतिम फैसला बदलेगा कई जिंदगियों की दिशा

यह विवाद केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि सत्य और असत्य के संघर्ष, कानूनी प्रक्रिया की मजबूती और न्यायिक व्यवस्था की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है। अब फैसला आने में कुछ ही दिन बचे हैं और पूरा जनपद उस घड़ी का इंतज़ार कर रहा है, जो कई ज़िंदगियों का भविष्य तय करेगी।

Report By: संजय कुमार राठौर   

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