MP EDUCATION SYSTEM: मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर शिवराज–मोहन सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि स्कूली शिक्षा में “सिस्टमिक कोलैप्स” जैसे हालात बन चुके हैं। कांग्रेस का आरोप है कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के हालिया बयान ने भी अप्रत्यक्ष रूप से राज्य की कमजोर शिक्षा गुणवत्ता की ओर इशारा किया है।
केंद्रीय मंत्री के बयान पर बढ़ा राजनीतिक तापमान
पटवारी ने कहा कि यदि 50 लाख से अधिक बच्चों को “सेब” जैसे आम फल का नाम तक नहीं पता, तो यह स्कूलों के आधारभूत ढांचे और शिक्षण के स्तर में गंभीर खामियों का संकेत है। कांग्रेस ने इसे केवल एक बयान नहीं, बल्कि मौजूदा शिक्षा मॉडल पर सवाल उठाने वाली “चेतावनी” बताया।
MP EDUCATION SYSTEM: सेवाओं की गुणवत्ता पर कांग्रेस के आरोप
कांग्रेस का कहना है कि राष्ट्रीय शोध संस्थानों और विभिन्न एजेंसियों की रिपोर्टें लगातार शिक्षा, पोषण और बाल कल्याण से जुड़ी चिंताजनक तस्वीर दिखाती रही हैं। पार्टी ने हाल ही में सामने आए वीडियो और जांच रिपोर्टों का हवाला देते हुए दावा किया कि मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता और स्कूलों की निगरानी व्यवस्था कमजोर होती जा रही है। वरिष्ठ नेता राहुल गांधी द्वारा ‘कागज़ की थाली’ में परोसे भोजन का मामला भी कांग्रेस ने प्रमुखता से उठाया।
MP EDUCATION SYSTEM: UDISE+ डेटा में 56 लाख बच्चों के ‘सिस्टम से गायब’
सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस ने UDISE+ डेटा को लेकर खड़ा किया। उसके मुताबिक, 2017–18 में जहां छात्रों की संख्या 1.6 करोड़ थी, वहीं 2024–25 में यह घटकर 1.04 करोड़ रह गई अर्थात करीब 56 लाख बच्चे स्कूल सिस्टम से बाहर हैं। कांग्रेस का कहना है कि सरकार यह स्पष्ट करे कि आखिर इतने बच्चे शिक्षा व्यवस्था से क्यों गायब हो गए।
बजट बढ़ने के बावजूद स्कूलों में सुधार क्यों नहीं?
पटवारी ने दावा किया कि राज्य का शिक्षा बजट 7,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 37,000 करोड़ रुपये होने के बावजूद स्कूलों में प्राचार्यों की कमी, एकल-शिक्षक स्कूलों की संख्या और कमजोर मध्याह्न भोजन योजना जैसे मुद्दे जस के तस बने हुए हैं। उनके अनुसार, “पैसा बढ़ा, लेकिन न तो सीखने के परिणाम बदले और न ही बच्चों की स्थिति।”
CBI–ED जांच की मांग, सरकार की जवाबदेही पर जोर
कांग्रेस ने इसे “प्राथमिकताओं की गड़बड़ी” और “नीतिगत खामियों” का परिणाम बताते हुए सरकार से पारदर्शी जवाब मांगा। पार्टी ने सवाल उठाया कि क्या राज्य सरकार इन अनियमितताओं की CBI या ED जैसी एजेंसियों से जांच कराने को तैयार है। पटवारी ने कहा, “बच्चों का भविष्य सिर्फ सरकार बनाम विपक्ष की बहस नहीं है यह एक सामाजिक चेतावनी है। हम 56 लाख बच्चों की बात कर रहे हैं, कोई राजनीतिक आंकड़ा नहीं।”
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