Supreme Court on BLOs: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में शामिल बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) पर बढ़ते दबाव और धमकियों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए नया नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि बीएलओ की सुरक्षा को लेकर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर जताई असहमति
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि कई राजनीतिक नेता सुप्रीम कोर्ट का उपयोग “प्रमुखता पाने के मंच” के रूप में कर रहे हैं।
उन्होंने कहा “हर राजनीतिक मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में आ जाना सही परंपरा नहीं है।” पीठ ने यह भी कहा कि एसआईआर प्रक्रिया को लेकर अधिकतर राजनीतिक विवाद अदालत में लाए जा रहे हैं, जबकि ये प्रशासनिक स्तर पर सुलझाए जा सकते हैं।
Supreme Court on BLOs: बीएलओ पर हिंसा का ताज़ा मामला
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने बताया कि याचिकाओं में जिन घटनाओं का उल्लेख है, उनमें से अधिकांश पुराने मामले हैं। अदालत के अनुसार, अभी तक बीएलओ पर हिंसा से जुड़ी केवल एक नई एफआईआर दर्ज है। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव से पहले पुलिस प्रशासन को सीधे चुनाव आयोग के अधीन करने की मांग उचित नहीं है।
Supreme Court on BLOs: बीएलओ को लेकर अदालत चिंतित
चुनाव आयोग के वकील ने अदालत में माना कि बीएलओ को सुरक्षा और कार्य-सुविधाओं की जरूरत है। इससे पहले 4 दिसंबर की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने बताया था कि देशभर में 35–40 बीएलओ अधिक तनाव और कार्यभार के कारण जान गंवा चुके हैं। अदालत ने राज्यों को निर्देश दिया था कि अतिरिक्त स्टाफ तैनात कर बीएलओ का बोझ कम किया जाए और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने पर विचार हो।
अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती करें
पीठ ने दोहराया कि एसआईआर प्रक्रिया वैध प्रशासनिक कार्रवाई है और समय पर पूरी करना आवश्यक है।अगर किसी राज्य में स्टाफ की कमी है, तो तुरंत नए कर्मचारी तैनात किए जाएं। साथ ही बीमार या अत्यधिक तनाव में काम कर रहे बीएलओ को राहत देते हुए वैकल्पिक स्टाफ उपलब्ध कराने को कहा गया।
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