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Underwater Drone से रेलवे पुलों की सुरक्षा हुई और मजबूत, यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे की हाई-टेक तैयारी

अलीपुरद्वार में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने 34 पुलों की पानी के नीचे जांच के लिए अंडरवॉटर ड्रोन का उपयोग शुरू किया। ब्रह्मपुत्र, तेस्ता और अन्य नदियों में पुलों की संरचना अब आधुनिक तकनीक से सुरक्षित ढंग से जाँची जा रही है।
अलीपुरद्वार रेलवे पुलों की पानी के नीचे जांच

Underwater Dron: अलीपुरद्वार में पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे ने यात्रियों की सुरक्षा को और  भी ज्यादा मजबूत बनाने के लिए एक अहम फैसला लिया गया है। बता दें, अब रेलवे अपने 34 पुलों की पानी के नीचे की जांच करने के लिए एक खास तरह का अंडरवॉटर रोबोट ड्रोन का उपयोग कर रहा है, जो आधुनिक तकनीक से लैस है।

अलीपुरद्वार रेलवे पुलों की पानी के नीचे जांच
अलीपुरद्वार रेलवे पुलों की पानी के नीचे जांच

Underwater Dron: सराईघाट समेत 34 पुलों की पानी के नीचे जांच पूरी

Underwater Dron:  इस ड्रोन के जरिए ब्रह्मपुत्र नदी पर बने मशहूर सराईघाट ब्रिज के साथ-साथ अलीपुरद्वार डिवीजन के 18 बड़े पुलों की पानी के अंदर की संरचना की जाँच पहले से ही हो चुकी है।

पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे का नेटवर्क करीब 4200 किलोमीटर लंबा है और इसमें कई नदियों पर बने बड़े पुल शामिल हैं। कई नदियाँ तो इनमें ऐसी हैं जिनमें पूरे सालभर गहरा पानी भरा रहता है। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रेलवे इंजीनियरिंग टीम इन पुलों की समय-समय पर जांच करती रहती है।

Underwater Dron: अलीपुरद्वार रेलवे पुलों की पानी के नीचे जांच
अलीपुरद्वार रेलवे पुलों की पानी के नीचे जांच

DRM का दावा: अब हर छिपी खामी स्पष्ट दिखेगी

Underwater Dron: पहले ब्रह्मपुत्र, तेस्ता, जलढाका और तोर्सा जैसी गहरी नदियों में पुलों के नीचे मौजूद पिलरों की सही हालत को जान पाना बहुत मुश्किल था। क्योंकि पानी के नीचे कुछ भी साफ दिख नहीं पाता था, जिससे पुल की स्थिति का पता नहीं चलता था। अब यह नई तकनीक उन मुश्किलों को दूर कर रही है। इस ड्रोन से पुलों की संरचना की लाइडार, थर्मल इमेजिंग, ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार और अल्ट्रासोनिक तकनीक के मदद से गहराई से जाँच की गई।

अलीपुरद्वार जंक्शन के मंडल रेल प्रबंधक (DRM) देवेंद्र सिंह का कहना है कि जिन हिस्सों को बाहर से देखना संभव नहीं था, उन सभी क्षेत्रों की स्पष्ट तस्वीरें अब यह अंडरवॉटर रोबोट आसानी से कैप्चर कर लेता है। 34 में से 18 पुल अलीपुरद्वार डिवीजन में हैं, जहाँ इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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