Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के मोहम्मदी विकास खंड परिसर में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम उस समय सियासी और प्रशासनिक विवाद का केंद्र बन गया, जब दिव्यांगजनों को वितरित की गई ट्राई साइकिलों पर स्थानीय जनप्रतिनिधि, विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह, का नाम और फोटो अंकित नहीं पाया गया। दिव्यांग जन सशक्तिकरण योजना के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम जहाँ एक ओर 46 लाभार्थियों के लिए खुशी का मौका लेकर आया, वहीं दूसरी ओर स्थानीय विधायक की कड़ी आपत्ति के कारण प्रशासनिक लापरवाही के आरोपों से घिर गया।
जनप्रतिनिधि की अनदेखी बनी विवाद का कारण
दरअसल, कार्यक्रम में उत्साह का माहौल था, जहाँ बड़ी संख्या में दिव्यांगजन और उनके परिजन एकत्रित हुए थे। इस अवसर पर कुल 46 ट्राई साइकिलें दिव्यांगों को वितरित की गईं, जो उनकी गतिशीलता और सशक्तिकरण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम था। लाभार्थियों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी। हालाँकि, जब वितरण प्रक्रिया चल रही थी, तभी स्थानीय विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह ने इस बात पर गौर किया कि वितरित की जा रही किसी भी ट्राई साइकिल पर उनका नाम या फोटो अंकित नहीं है। सरकारी कार्यक्रमों और योजनाओं के तहत वितरित की जाने वाली सामग्री पर अक्सर स्थानीय जनप्रतिनिधियों, जैसे विधायक या सांसद, का नाम और तस्वीर अंकित होती है, ताकि जनता तक यह संदेश पहुँचे कि ये योजनाएँ किसके माध्यम से क्रियान्वित की जा रही हैं। विधायक सिंह ने इसी प्रोटोकॉल और अपेक्षा की अनदेखी पर तत्काल कड़ी नाराज़गी व्यक्त की।
Lakhimpur Kheri: अधिकारियों से माँगा गया स्पष्टीकरण
विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह ने मंच से ही संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों, विशेष रूप से जिला दिव्यांग अधिकारी, से इस चूक के संबंध में तत्काल स्पष्टीकरण मांगा। विधायक का स्पष्ट तर्क था कि सरकार की योजनाएं तभी सार्थक होती हैं जब वे जनप्रतिनिधियों के माध्यम से आम जनता तक पहुँचती हैं। ऐसे में कार्यक्रमों और वितरित सामग्री पर जनप्रतिनिधियों की पहचान होना आवश्यक है। यह केवल प्रोटोकॉल का मामला नहीं है, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही और पारदर्शिता का भी प्रतीक है। हालाँकि, जब जिला दिव्यांग अधिकारी से इस संबंध में जवाब माँगा गया, तो वह विधायक की आपत्ति पर कोई संतोषजनक या तार्किक स्पष्टीकरण नहीं दे सके। अधिकारियों की यह चुप्पी विधायक की नाराज़गी को और बढ़ा गई।
प्रशासनिक लापरवाही पर कड़ा रुख
विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह ने इस पूरी घटना को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही करार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि एक तरह से सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुँचाने में जानबूझकर की गई अनदेखी भी है। उन्होंने मौके पर मौजूद सभी ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों को सख्त लहजे में हिदायत दी कि भविष्य में आयोजित होने वाले किसी भी सरकारी कार्यक्रम या सामग्री वितरण में इस प्रकार की अनदेखी या चूक बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विधायक ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन से मामले की विस्तृत जाँच करने और इस चूक के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि योजनाओं को सफल बनाने के लिए यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि स्थानीय प्रशासन पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ काम करे और जनप्रतिनिधियों के समन्वय का ध्यान रखे।
Lakhimpur Kheri: स्थानीय स्तर पर गरमाया सियासी माहौल
इस कार्यक्रम में ब्लॉक स्तरीय अधिकारी, कर्मचारी, लाभार्थी दिव्यांगजन और उनके परिजन उपस्थित थे। विधायक की सरेआम नाराज़गी और प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी ने पूरे मामले को स्थानीय राजनीति में गर्मा दिया है। विधायक का कड़ा रुख यह स्पष्ट संकेत देता है कि वह किसी भी स्तर पर सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रशासनिक शिथिलता को स्वीकार नहीं करेंगे। यह घटना अब मोहम्मदी क्षेत्र में चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है, जहाँ लोग इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या यह वास्तव में केवल एक प्रोटोकॉल की चूक थी, या फिर प्रशासनिक और जनप्रतिनिधि के बीच समन्वय की कमी को दर्शाती है। विधायक की कार्रवाई की माँग से यह उम्मीद है कि इस मामले में जल्द ही कोई प्रशासनिक जाँच शुरू हो सकती है।
Report By: संजय कुमार राठौर
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