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‘अरी ओ मईया देख जरा, तेरा लाला भूखा बैठा है…’ 500 वर्षों में पहली बार बांके बिहारी मंदिर में टूटी ये परंपरा

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Banke Bihari Mandir: अरी ओ मईया देख जरा.. तेरा लाला भूखा बैठा है… यह बात बीते दिन सोमवार की सुबह ठाकुर बांके बिहारी जी ने अपनी मैया से जरूर कही होगी। क्योंकि सृष्टि के रचयिता और दुनिया के पालनहार ठाकुर बांके बिहारी जी दर्शन देने तो बैठ गए लेकिन चेहरा प्रतिदिन की तरह चमकता नजर नहीं आ रहा था। जबकि पेट भी चिपका हुआ सा लग रहा था दर्शन करने आए भक्तों को लगा जैसे वह कह रहे हो यशोदा मैया तेरा लाला भूखा है, क्योंकि जिनको बालभोग की जिम्मेदारी दी गई थी, उन्होंने सोमवार सुबह मेरी तरफ देखा भी नहीं। ‌ जबकि मुझे हर रोज बालभोग चाहिए। मैं तो किसी से कह भी नहीं सकता क्योंकि सब यही कह देते हैं सब लाला की ही लीला है। मैया सच बताऊं तो 500 वर्षों में यह पहली बार हुआ है, जब मुझे सुबह किसी ने बालभोग नहीं दिया।

पहले जानें क्या है मामला…

वृंदावन स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर में सोमवार को एक असामान्य स्थिति देखने को मिली, जब प्रभु को अर्पित किया जाने वाला बालभोग निर्धारित समय पर नहीं लग सका। मंदिर खुलने से पहले अर्पित होने वाला यह पावन भोग करीब डेढ़ घंटे की देरी से भगवान श्री बांके बिहारी जी को अर्पित किया गया। मंदिर सूत्रों के अनुसार, हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी द्वारा निर्धारित हलवाई को समय पर भुगतान न होने के कारण सोमवार सुबह बालभोग तैयार नहीं हो सका। बाद में कमेटी के एक सदस्य के हस्तक्षेप के बाद हलवाई ने बालभोग बनाया, जिसके बाद करीब सुबह 10 बजे भगवान को भोग अर्पित किया गया।

Banke Bihari Mandir: दर्शन से पहले लगता है बालभोग

आपको बता दें कि श्री बांके बिहारी जी को प्रतिदिन तीन बार भोग अर्पित किया जाता है। सबसे पहले मंदिर के कपाट खुलने से पूर्व श्रृंगार के पश्चात बालभोग लगाया जाता है, जिसमें दो प्रकार की मिठाई और दो नमकीन व्यंजन शामिल होते हैं। इसके बाद दोपहर में राजभोग और रात्रि में शयन भोग अर्पित किया जाता है।

सर्दियों के मौसम में बालभोग सामान्यत सुबह करीब 8:30 बजे लगाया जाता है, लेकिन सोमवार को यह परंपरा टूट गई। यह पहला अवसर है जब समय से पहले लगने वाला बालभोग निर्धारित समय पर प्रभु को अर्पित नहीं हो सका, जिससे भक्तों में भी चर्चा का विषय बना रहा।

समय पर नहीं हुआ भुगतान

हाई पावर मैनेजमेंट कमेटी के गठन के बाद मंदिर में भोग निर्माण के लिए एक हलवाई नियुक्त किया गया था, जिसे प्रतिमाह 90 हजार रुपये का भुगतान तय था। कमेटी सदस्य दिनेश गोस्वामी ने बताया कि कई बार कहने के बावजूद हलवाई को भुगतान नहीं किया जा रहा है। कुछ दिन पूर्व उन्होंने स्वयं अपने पास से 50 हजार रुपये दिए थे, जिससे भोग निर्माण शुरू हो सका था। अब पुनः भुगतान की समस्या उत्पन्न होने पर सोमवार को बालभोग में देरी हुई। फिलहाल शीघ्र भुगतान का आश्वासन मिलने के बाद हलवाई ने भोग तैयार किया।

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