Moradabad News: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में जारी कड़क शीतलहर ने इंसान तो क्या, जानवरों तक के लिए जीवन मुश्किल बना दिया है। गिरते तापमान ने न केवल इंसानों को परेशान किया है, बल्कि यहां के जानवरों, विशेषकर बंदरों, के लिए भी जीवन का अस्तित्व संकट में डाल दिया है। शीतलहर से बचने के लिए ये बंदर अब श्मशान घाटों की जलती हुई चिताओं की आंच का सहारा ले रहे हैं, जो उनकी जान बचाने का एकमात्र तरीका बन चुकी है।
ठंड ने किया बंदरों का जीना मुश्किल
मुरादाबाद के श्मशान घाटों में इन दिनों एक विचलित करने वाली तस्वीर देखने को मिल रही है। जहां इंसान अपने प्रियजनों को अंतिम विदाई देने के बाद लौट जाते हैं, वहीं शीतलहर के प्रकोप से बेहाल बंदर जलती चिताओं की राख के पास दुबक कर बैठे रहते हैं। यह दृश्य जितना आश्चर्यचकित करने वाला है, उतना ही दिल दहला देने वाला भी है। इन बंदरों के लिए चिता की बची हुई राख अब उनके शरीर को गर्म रखने का एकमात्र जरिया बन गई है। ठंड से बचने के लिए ये मजबूरी में इस भयानक माहौल का हिस्सा बन रहे हैं।
Moradabad News: कुदरत की मार और ठंड से जूझते बंदर
मौसम विभाग के अनुसार, मुरादाबाद में पारा शून्य के करीब पहुंच चुका है और घने कोहरे के कारण ठंड की मार और भी तेज हो गई है। ठंड से बचने के लिए जंगलों और पेड़ों पर जमा ओस इन बंदरों के लिए घातक साबित हो रही है। उनकी भूख और प्यास को कम करने के बजाय, यह ठंड उनकी जान के लिए खतरे का कारण बन रही है। स्थानीय लोग बताते हैं कि पहले यह बंदर जंगलों में सुरक्षित रहते थे, लेकिन अब पेड़-पौधों पर जमा ओस के कारण उनके लिए वहां रहना मुश्किल हो गया है। ऐसे में श्मशान घाटों की राख ही अब उनका एकमात्र ठिकाना बन गया है।
यह दृश्य हमें यह सोचने पर मजबूर करता है कि इस भीषण ठंड में इन बेजुबानों की देखभाल कौन करेगा। एक तरफ इंसान अपनी समस्याओं में घिरा हुआ है, वहीं दूसरी तरफ यह बंदर अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अगर यह स्थिति यूं ही जारी रही, तो इन जीवों के अस्तित्व पर बड़ा सवाल खड़ा हो सकता है। यह नजारा यह भी बताता है कि हम इंसानों की जिम्मेदारी केवल अपनी जिंदगी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि हमें प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति भी संवेदनशील होना चाहिए।
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