NIA NEWS: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत में शनिवार को पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के 20 शीर्ष नेताओं के खिलाफ आरोप तय करने को लेकर सुनवाई हुई। यह सुनवाई दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में आयोजित की गई, जहां एनआईए ने अदालत के समक्ष अपनी दलीलें पूरी कर दीं।
शरिया कानून लागू करने का था मकसद: NIA
सुनवाई के दौरान एनआईए ने अदालत को बताया कि पीएफआई का उद्देश्य देश में शरिया कानून लागू करना था। इसके लिए संगठन ने देशभर में अपने कार्यालय खोले और मुस्लिम युवाओं को दूसरे धर्मों के खिलाफ भड़काने का प्रयास किया। एजेंसी के अनुसार, यह गतिविधियां सुनियोजित तरीके से चलाई जा रही थीं।
NIA NEWS: बीजेपी नेता भी निशाने पर
एनआईए ने दावा किया कि पीएफआई की गतिविधियों के निशाने पर कई भाजपा नेता और आरएसएस के सदस्य भी थे। एजेंसी ने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल धार्मिक हिंसा फैलाना नहीं, बल्कि युवाओं को कट्टरपंथ की ओर आकर्षित कर देश में भय और अलगाव का माहौल बनाना था।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया
एनआईए ने अदालत में तर्क दिया कि पीएफआई की गतिविधियां कानून व्यवस्था के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द के लिए भी गंभीर खतरा थीं। एजेंसी ने सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। अदालत ने दलीलें सुनने के बाद अगली सुनवाई की तारीख 23 दिसंबर 2025 तय की है।
NIA NEWS: 2022 में संगठन पर लगा था प्रतिबंध
गौरतलब है कि एनआईए ने वर्ष 2022 में पीएफआई के 20 नेताओं को गिरफ्तार किया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने संगठन पर प्रतिबंध लगाते हुए इसे गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत 28 सितंबर 2022 से पांच साल के लिए बैन कर दिया था।
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