Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जनपद के पलिया और निघासन तहसील में दशकों से शारदा नदी द्वारा मचाई जा रही तबाही और सरकारी धन के बंदरबांट का मामला अब गंभीर मोड़ पर आ गया है। हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त माननीय मुख्य जज ए.आर. मसूदी ने शारदा नदी में 23 करोड़ रुपये की लागत से हुए ड्रेजिंग (नदी की खुदाई और सफाई) कार्यों का स्वयं स्थलीय निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के बाद सिंचाई विभाग और संबंधित ठेकेदारों में हड़कंप मचा हुआ है।
दशकों का दर्द और कानूनी लड़ाई
- समाजसेवी राजेश भारती की मुहिम
लखीमपुर खीरी के पलिया और निघासन क्षेत्र में शारदा नदी हर साल हजारों एकड़ फसल बर्बाद करती है और दर्जनों गांव जलमग्न हो जाते हैं। प्रशासन के ढुलमुल रवैये को देखते हुए प्रख्यात समाजसेवी राजेश भारती ने सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (रिट) दाखिल की थी। इस याचिका में नदी की धारा को मोड़ने और ड्रेजिंग के नाम पर हो रही खानापूर्ति पर सवाल उठाए गए थे।
- कोर्ट की सख्ती और 23 करोड़ का बजट
राजेश भारती की याचिका पर संज्ञान लेते हुए माननीय हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया था। कोर्ट की सख्ती के बाद आनन-फानन में सरकार ने शारदा नदी में ड्रेजिंग योजना के लिए 23 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया। कागजों पर काम शुरू हुआ और विभाग ने दावा किया कि ड्रेजिंग से बाढ़ की समस्या का समाधान हो जाएगा।
- लापरवाही की शिकायत और जवाबी हलफनामा
ड्रेजिंग के कार्य पूरे होने के बाद भी धरातल पर स्थितियां जस की तस बनी रहीं। समाजसेवी राजेश भारती ने कोर्ट को सूचित किया कि 23 करोड़ की लागत से हुआ काम महज एक दिखावा था और इसमें भारी लापरवाही बरती गई है। उन्होंने कोर्ट में जवाबी हलफनामा दाखिल कर मांग की कि इस कार्य की जांच सेवानिवृत्त जजों की अध्यक्षता में कराई जाए।
- ग्राउंड जीरो पर पहुंचे रिटायर्ड जज ए.आर. मसूदी
राजेश भारती की मांग और मामले की गंभीरता को देखते हुए, हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त माननीय मुख्य जज ए.आर. मसूदी ने स्वयं प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने शारदा नदी के उन स्थलों का निरीक्षण किया जहाँ ड्रेजिंग का दावा किया गया था। निरीक्षण के दौरान स्थानीय ग्रामीणों ने भी जज साहब को अपनी समस्याओं और बाढ़ से होने वाले नुकसान के बारे में विस्तार से बताया।
Lakhimpur Kheri: निरीक्षण के मायने: अब क्या होगा?
इस उच्चस्तरीय निरीक्षण के बाद तैयार होने वाली रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की जाएगी। यदि ड्रेजिंग के कार्यों में धांधली या तकनीकी खामियां पाई जाती हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और इंजीनियरों पर गाज गिरना तय है। राजेश भारती की यह कानूनी लड़ाई अब रंग लाती दिख रही है, जिससे क्षेत्र के पीड़ित किसानों को न्याय की उम्मीद जगी है।
- निरीक्षण कर्ता: ए. आर. मसूदी (सेवानिवृत्त मुख्य जज, हाईकोर्ट)।
- परियोजना लागत: 23 करोड़ रुपये।
- विवाद: ड्रेजिंग कार्यों में भारी लापरवाही और बजट के दुरुपयोग की आशंका।
- याचिकाकर्ता: समाजसेवी राजेश भारती।







