Supreme Court: बहुत समय से आम जनता की मांग थी कि मुकदमों के निपटारे में देरी नहीं होनी चाहिए। इसी बात को संज्ञान में लेते हुए कोर्ट ने सर्कुलर जारी कर वकीलों को हिदायत दी कि वे केस के बहस का समय तय करें, और उसी के भीतर निपटारा किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार वकीलों की मौखिक बहस के लिए समय सीमा पर जोर दिया। कोर्ट ने शीघ्र न्याय और प्रभावी कोर्ट प्रबंधन को मजबूत करने के लिए समय सीमा पालन करने के लिए यह कदम उठाया है। पुप्रीम कोर्ट के द्वारा सर्कुलर के अनुसार किसी भी मामले में कोर्ट से नोटिस जारी होने के बाद नियमित सुनवाई में मौखिक दलीलों के लिए तय समय सीमा का यह नियम और एसओपी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट के इस नियम से सुस्त वकील, जो न्याय व्यवस्था लंबा समय खींचने की कोशिश करते हैं, उन पर लगाम कसी गई है। यानी मौखिक दलीलों में लगने वाले समय की अनिश्चितता समाप्त होगी और केस का जल्दी निपटारा होगा।
सुप्रीम कोर्ट के जारी सर्कुलर में कहा गया है कि मौखिक बहस के लिए समय सीमा के लिए एसओपी यानी मानक संचालन प्रक्रिया जारी करने का उद्येश्य प्रभावी कोर्ट प्रबंधन ,न्यायालय के कार्य घंटों का समान वितरण और न्याय का त्वरित एवं उचित प्रशासन सुनिश्चित करना है। एसओपी के अनुसार किसी मामले में नोटिस जारी होने के बाद, होनेवाली नियमित सुनवाई में वरिष्ठ वकील, बहस करने वाले वकील या एडवोकेट आन रिकार्ड सुनवाई होने से कम से कम एक दिन पूर्व मौखिक बहस की समय सीमा कोर्ट में दाखिल कर देंगे। लिखित दलीलें भी पांच पेज से अधिक की नहीं होनी चाहिए। सुनवाई की तारीख से कम से कम तीन दिन पहले संक्षिप्त नोट या लिखित दलीलें दाखिल करेंगे, ताकि समय सीमा का पालन सुनिश्चित किया जा सके।
सुप्रीम कोर्ट में इस समय लंबित 92 हजार केस हैं। इसमें 72,658 दीवानी और 19,352 आपराधिक मामले हैं। इनमें से 219 केसों की सुनवाई तीन जजों की पीठ, 27 मामलों की सुनवाई पांच जजों की पीठ, 6 मामलों की सुनवाई सात जजों और चार केसों की सुनवाई नौ जजों की पीठ में होनी है। सुप्रीम कोर्ट में इस वर्ष 87 प्रतिशत मामलों का निपटारा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की इस व्यवस्था से उम्मीद करते हैं कि निचली अदालतें भी अनुकरण करेंगी।
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