Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र का महत्वपूर्ण जिला लखीमपुर खीरी इन दिनों विकास के दावों के बीच एक ऐसी समस्या से जूझ रहा है जिसने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। शहर का हृदय स्थल माना जाने वाला ‘नौरंगाबाद मुख्य चौराहा’ अब सुगम यातायात के बजाय ‘जाम के स्थायी केंद्र’ के रूप में अपनी पहचान बना चुका है। सुबह की पहली किरण से लेकर देर रात तक, यह चौराहा अव्यवस्था की ऐसी कहानी बयां करता है, जिससे शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लग रहे हैं।
बेकाबू ई-रिक्शा
नौरंगाबाद चौराहे पर जाम की सबसे बड़ी और भयावह वजह है शहर में कुकुरमुत्ते की तरह बढ़ रहे ई-रिक्शा। आंकड़ों और स्थानीय सूत्रों की मानें तो शहर की सड़कों पर सैकड़ों की संख्या में ऐसे ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं जिनका न तो कोई पंजीकरण है और न ही उनके चालकों के पास कोई वैध लाइसेंस। चौराहे के चारों ओर ई-रिक्शा चालक बेतरतीब ढंग से अपने वाहन खड़े कर देते हैं। सवारियों को बैठाने की होड़ में ये चालक सड़क के बीचों-बीच रिक्शा रोक देते हैं, जिससे पीछे आ रहे वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। प्रशासन द्वारा आज तक इन ई-रिक्शों के लिए कोई ‘रूट चार्ट’ या ‘स्टैंड’ निर्धारित नहीं किया गया, जिसका खामियाजा जनता भुगत रही है।
Lakhimpur Kheri: अतिक्रमण ने निगल ली सड़कें
सिर्फ ई-रिक्शा ही नहीं, बल्कि अवैध अतिक्रमण ने भी इस घाव को और गहरा कर दिया है। चौराहे के आसपास के दुकानदारों ने अपनी दुकानों का सामान सड़क तक फैला रखा है। इसके अलावा, अवैध रेहड़ी-पटरी वालों ने फुटपाथ और सड़क के किनारों पर कब्जा कर लिया है। सड़कों की चौड़ाई कागजों में तो पर्याप्त है, लेकिन मौके पर अतिक्रमण के कारण यह गलियों में तब्दील हो चुकी हैं। नगर पालिका परिषद इस पूरे मामले में ‘धृतराष्ट्र’ की भूमिका में नजर आ रही है। नौरंगाबाद चौराहा शहर के प्रमुख अस्पतालों और नर्सिंग होम्स को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। यह स्थिति तब और अधिक संवेदनशील हो जाती है जब जाम में जीवन और मौत के बीच जूझ रहे मरीज को ले जा रही एम्बुलेंस फंस जाती है। मिनटों का सफर घंटों में तब्दील होने के कारण कई बार मरीजों की जान पर बन आती है। इसके साथ ही, स्कूली बच्चे जो तपती धूप और कड़ाके की ठंड में घंटों इन जाम की गलियों में फंसे रहते हैं, उनके अभिभावकों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है।
प्रशासन की ‘खामोशी’ दे रही लापरवाही को बढ़ावा
हैरानी की बात यह है कि यातायात विभाग, नगर पालिका और स्थानीय पुलिस सब कुछ अपनी आंखों से देख रहे हैं। चौराहे पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी अक्सर मूकदर्शक बने रहते हैं या फिर छोटे वाहनों का चालान करने में व्यस्त रहते हैं, जबकि जाम की मुख्य जड़ यानी अवैध ई-रिक्शों और अतिक्रमणकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि ई-रिक्शा चालकों और अतिक्रमणकारियों के हौसले इसलिए बुलंद हैं क्योंकि उन्हें सत्ता या स्थानीय तंत्र का मौन संरक्षण प्राप्त है। नौरंगाबाद की वर्तमान स्थिति को देखकर शहरवासी अब यह पूछने पर मजबूर हैं कि “क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही जागेगा?” आए दिन जाम के कारण छोटी-मोटी झड़पें और दुर्घटनाएं आम बात हो गई हैं। अगर समय रहते ई-रिक्शा के लिए जोन निर्धारित नहीं किए गए और अतिक्रमण पर बुलडोजर नहीं चला, तो वह दिन दूर नहीं जब यह चौराहा पूरी तरह ठप हो जाएगा।
Report By: संजय कुमार
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