Lakhimpur Kheri: एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ डिजिटल ट्रांजैक्शन और ‘कैशलेस इकोनॉमी’ को बढ़ावा देने के लिए दिन-रात जोर दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लखीमपुर खीरी के गोला डिपो के कुछ कर्मचारी सरकार की इन मंशाओं को ठेंगे पर रख रहे हैं। ताजा मामला गोला डिपो की एक बस का है, जहां ऑनलाइन पेमेंट को लेकर यात्री और परिचालक के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
ऑनलाइन पैसा है तो बस से न करें सफर
लालपुर लखीमपुर से गोला जा रहे एक यात्री ने गोला डिपो की बस के परिचालक (कंडक्टर) विनोद कुमार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यात्री का कहना है कि जब उसने टिकट के लिए ऑनलाइन भुगतान (UPI/QR Code) करने की इच्छा जताई, तो कंडक्टर ने साफ इनकार कर दिया।
हैरानी की बात यह है कि मना करने के साथ-साथ कंडक्टर साहब ने यात्री को नसीहत तक दे डाली। यात्री के अनुसार, कंडक्टर विनोद कुमार का कहना था की लालपुर से गोला तक ऑनलाइन पेमेंट से टिकट नहीं होता। यदि आपके पास नकद पैसा नहीं है और सिर्फ ऑनलाइन पैसा है, तो उसके भरोसे न रहें और बस से सफर न करें।
Lakhimpur Kheri: क्या कहता है रोडवेज का नियम?
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम (UPSRTC) के नियमों के अनुसार, कोई भी रोडवेज परिचालक यात्रियों से ऑनलाइन भुगतान लेने से मना नहीं कर सकता। डिजिटल इंडिया अभियान के तहत बसों में ETM (Electronic Ticketing Machine) और QR कोड की सुविधा आधिकारिक तौर पर प्रदान की गई है। यह एक अनिवार्य सुविधा है, वैकल्पिक नहीं।
सरकारी दावों और जमीनी हकीकत में अंतर
एक तरफ परिवहन विभाग बड़े-बड़े विज्ञापनों के जरिए यात्रियों को सुविधा का भरोसा देता है, वहीं गोला डिपो के इस मामले ने विभाग की पोल खोल दी है। तकनीकी खराबी या नेटवर्क की समस्या की बात तो समझ आती है, लेकिन यात्री को “सफर न करने” की धमकी देना सीधे तौर पर यात्री अधिकारों का हनन और सरकारी आदेशों की अवहेलना है।
अधिकारियों से कार्रवाई की मांग
यात्री ने इस व्यवहार को अपमानजनक बताते हुए उच्चाधिकारियों से शिकायत की बात कही है। सवाल यह उठता है कि क्या परिवहन विभाग के इन कर्मचारियों को शासन के नियमों का डर नहीं है? क्या गोला डिपो के एआरएम (ARM) ऐसे परिचालकों पर कार्रवाई करेंगे जो यात्रियों को डिजिटल भुगतान के नाम पर प्रताड़ित कर रहे हैं?
Report By: sanjay kumar
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