Blinkit Delivery Boy: इन दिनों आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकइट जैसी ऑनलाइन डिलीवरी प्लेटफॉर्म से जुड़े डिलीवरी एजेंट्स की समस्याओं को उठाने के लिए सुर्खियों में हैं। इस बार उन्होंने कुछ ऐसा किया जिसने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच लिया। राघव चड्ढा ने एक दिन के लिए ब्लिंकिट डिलीवरी बॉय की भूमिका निभाई और खुद डिलीवरी एजेंट बनकर सड़कों पर निकल पड़े।
लोगों की बढ़ाई उत्सुकता
राघव चड्ढा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सोमवार को एक वीडियो शेयर किया और लिखा, “बोर्डरूम से दूर, जमीनी हकीकत में। मैंने उनका एक दिन जिया।” इसके साथ ही उन्होंने “स्टे ट्यून्ड!” लिखकर लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी। पोस्ट किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि चड्ढा ब्लिंकिट की पीली यूनिफॉर्म पहनते हैं, पीठ पर डिलीवरी बैग टांगते हैं और एक दूसरे ब्लिंकिट राइडर के साथ स्कूटर पर निकल पड़ते हैं। वीडियो में दोनों डिलीवरी करते नजर आते हैं, कभी लिफ्ट से उतरते हुए तो कभी किसी ग्राहक के दरवाजे तक पहुंचते हुए। वीडियो के अंत में वह एक डिलीवरी पूरी करने के लिए आगे बढ़ते दिखाई देते हैं।
Away from boardrooms, at the grassroots. I lived their day.
Stay tuned! pic.twitter.com/exGBNFGD3T
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) January 12, 2026
Blinkit Delivery Boy: क्यों बने राघव डिलीवरी एजेंट
दरअसल, यह पूरा मामला ऐसे ही नहीं है। करीब एक महीने पहले राघव चड्ढा ने गिग इकॉनमी की कड़वी सच्चाई को उजागर करते हुए एक पोस्ट किया था। उन्होंने ब्लिंकिट के एक डिलीवरी एजेंट की कमाई का स्क्रीनशॉट शेयर किया था, जिसमें दिखाया गया था कि 28 डिलीवरी करने के बाद उस राइडर को सिर्फ 762.57 रुपए मिले। उस स्क्रीनशॉट के मुताबिक, करीब 15 घंटे काम करने के बाद डिलीवरी एजेंट की प्रति घंटे की कमाई सिर्फ 52 रुपए थी। इसमें 690.57 रुपए ऑर्डर पेमेंट से, 72 रुपए इंसेंटिव से और बाकी कुछ भी नहीं। इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी थी। राघव चड्ढा ने तब लिखा था कि कम मजदूरी, भारी टारगेट, नौकरी की कोई सुरक्षा नहीं और सम्मान की कमी, यही आज के गिग वर्कर्स की हकीकत है।
उन्होंने कहा था कि भारत डिजिटल इकॉनमी का निर्माण कम वेतन पाने वाले और ज्यादा काम करने वाले लोगों की पीठ पर नहीं कर सकता। उनके मुताबिक, गिग वर्कर्स के लिए उचित वेतन, इंसानी काम के घंटे और सामाजिक सुरक्षा बेहद जरूरी हैं। इसके कुछ ही दिनों बाद चड्ढा ने उसी डिलीवरी बॉय हिमांशु के साथ एक और वीडियो शेयर किया, जिसमें दोनों साथ लंच करते नजर आए। करीब 17 मिनट के इस वीडियो में उन्होंने गिग वर्कर्स की परेशानियों, जोखिम, लंबे काम के घंटे और सुरक्षा के अभाव पर खुलकर बातचीत की। वहीं, राघव चड्ढा ने सदन में भी जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकइट के राइडर्स और डिलीवरी बॉय को हो रही समस्याओं को रखा था।
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