Brij Bhushan Singh News: उत्तर प्रदेश के दबंग नेता और कैसरगंज से पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर अपने बयान को लेकर सियासी सुर्खियों में हैं। हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि अगर वह जीवित रहे तो 2029 का लोकसभा चुनाव जरूर लड़ेंगे, चाहे उन्हें भाजपा से टिकट मिले या नहीं। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या बृजभूषण भाजपा से अलग रास्ता अपनाने की तैयारी में हैं।
जन्मदिन से पहले शक्ति प्रदर्शन, फिर बड़ा बयान
बृजभूषण शरण सिंह ने हाल ही में अपना जन्मदिन मनाया, जिसे राजनीतिक हलकों में शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा गया। इसके तुरंत बाद 2029 चुनाव को लेकर दिए गए उनके बयान ने अटकलों को और हवा दे दी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पहली कोशिश भाजपा के टिकट से ही चुनाव लड़ने की रहेगी।
Brij Bhushan Singh News: टिकट न मिलने की टीस फिर आई सामने
गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों के चलते भाजपा ने बृजभूषण को कैसरगंज से टिकट नहीं दिया था। पार्टी ने उनकी जगह उनके बेटे करण भूषण सिंह को मैदान में उतारा, जिन्होंने चुनाव जीतकर सीट बरकरार रखी।
बृजभूषण ने एक बातचीत में दावा किया कि उन्हें साजिश के तहत राजनीति से अलग किया गया और उन्होंने कहा, “अगर मैं जिंदा रहा तो लोकसभा लौटकर उस अपमान का हिसाब जरूर चुकता करूंगा।”
बयान को कितनी गंभीरता से लें?
राजनीतिक विश्लेषक का मानना है कि 2029 को लेकर अभी दिए गए बयान को फिलहाल गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक भाजपा इस समय 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है और 2029 की राजनीति पर अभी से कोई फैसला तय नहीं माना जा सकता।
Brij Bhushan Singh News: क्या सपा में वापसी का विकल्प खुला है?
बृजभूषण शरण सिंह के समाजवादी पार्टी से पुराने रिश्ते भी चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव की खुले तौर पर तारीफ करते हुए कहा कि कठिन समय में अखिलेश ने उनके खिलाफ एक शब्द नहीं कहा। इस बयान को सियासी संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि जानकारों का मानना है कि मौजूदा हालात में बृजभूषण किसी दूसरी पार्टी में जाने का जोखिम नहीं उठाएंगे।
BJP को होगा नुकसान?
विश्लेषकों का कहना है कि अगर बृजभूषण सिंह भाजपा से नाराज भी होते हैं तो पार्टी के पास हर सीट के लिए वैकल्पिक रणनीति मौजूद है। वहीं यह भी माना जा रहा है कि उनके दोनों बेटे भाजपा के टिकट पर विधायक और सांसद हैं और भविष्य में मंत्री पद के दावेदार हो सकते हैं। ऐसे में बृजभूषण ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे उनके परिवार की राजनीतिक राह मुश्किल हो।
क्षेत्र में मजबूत पकड़, शिक्षा के जरिए प्रभाव
बृजभूषण शरण सिंह का गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती जिलों में खासा प्रभाव माना जाता है। उन्होंने इन क्षेत्रों में दर्जनों डिग्री और इंटर कॉलेज स्थापित किए हैं, जिससे शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी मजबूत पकड़ बनी हुई है। यही वजह है कि उनके किसी भी बयान को राजनीतिक हलकों में गंभीरता से लिया जाता है।
लंबा राजनीतिक सफर
बृजभूषण का संसदीय सफर 1991 में गोंडा से शुरू हुआ। 1996 में कानूनी मामलों के कारण वे चुनाव नहीं लड़ सके, तब उनकी पत्नी केतकी सिंह ने जीत दर्ज की। 1999 में वे फिर भाजपा के टिकट पर सांसद बने। 2009 में पार्टी से अलग होकर सपा में गए और कैसरगंज से जीत हासिल की। 2014 में भाजपा में वापसी कर उन्होंने फिर से लोकसभा में जगह बनाई।
आगे की राह क्या?
फिलहाल बृजभूषण शरण सिंह का बयान भविष्य की राजनीति को लेकर संकेत जरूर देता है, लेकिन यह तय है कि 2029 तक उनकी भूमिका और रणनीति कई मोड़ों से गुजरेगी। अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में भाजपा और बृजभूषण के रिश्ते किस दिशा में जाते हैं।
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