Telangana News: मकर संक्रांति जैसे उल्लास भरे पर्व के दिन तेलंगाना से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। उत्तर प्रदेश से रोज़गार की तलाश में आए 35 वर्षीय युवक की जान एक जानलेवा पतंग के धागे ने ले ली। यह हादसा संगारेड्डी जिले के फसालवाड़ी गांव में हुआ, जहां प्रतिबंधित सिंथेटिक (चाइनीज) मांझे ने युवक का गला काट दिया।
Telangana News: बाइक से बाजार जाते समय हुआ हादसा
मृतक की पहचान अविदेश कुमार के रूप में हुई है, जो महज एक दिन पहले ही काम की तलाश में संगारेड्डी पहुंचे थे। बुधवार दोपहर वह मोटरसाइकिल से सब्जी खरीदने बाजार जा रहे थे। इसी दौरान सड़क पर हवा में लटका हुआ पतंग का कटा हुआ सिंथेटिक मांझा उनके गले में फंस गया।तेज़ रफ्तार बाइक और मजबूत मांझे के कारण धागा गले में कस गया और गहराई तक कट लग गया। मौके पर ही अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत मदद की कोशिश की और एम्बुलेंस बुलाई, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही अविदेश की मौत हो गई।
Telangana News: पुलिस ने मांझा जब्त कर शुरू की जांच
घटना की सूचना मिलते ही संगारेड्डी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने नीले रंग के सिंथेटिक मांझे को जब्त कर लिया है और मामला दर्ज कर शव को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया गया है। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यही मांझा मौत की वजह बना।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तेलंगाना सरकार ने वर्ष 2016 में ही नायलॉन और सिंथेटिक मांझे पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था, क्योंकि यह इंसानों और पक्षियों दोनों के लिए बेहद खतरनाक है। इसके बावजूद बाजारों में चोरी-छिपे इसकी बिक्री और इस्तेमाल लगातार जारी है।
क्यों इतना खतरनाक है सिंथेटिक मांझा?
यह मांझा साधारण सूती धागे जैसा नहीं होता। इसमें कांच और धातु के बारीक कण लगे होते हैं, जिससे यह बेहद तेज धार वाला बन जाता है। यह आसानी से टूटता नहीं और संपर्क में आते ही मांस तक काट देता है। यही वजह है कि यह कई बार “मौत का धागा” साबित हो चुका है।संगारेड्डी और हैदराबाद के आसपास के इलाकों में बीते एक सप्ताह में मांझे से घायल होने की यह तीसरी बड़ी घटना है। इससे पहले एक पुलिस अधिकारी और एक अन्य राहगीर भी इसी तरह घायल हो चुके हैं।
Telangana News: गुस्से में स्थानीय लोग, सख्त कार्रवाई की मांग
अविदेश की मौत के बाद इलाके में भारी आक्रोश है। वह अपने पीछे पत्नी, एक बेटा और एक बेटी को छोड़ गए हैं, जिनके सामने अब जीवनयापन का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि केवल कागजों पर प्रतिबंध काफी नहीं, बल्कि इस कातिल मांझे की बिक्री और इस्तेमाल करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।हर साल त्योहारों के दौरान ऐसे हादसे सामने आते हैं, लेकिन प्रशासनिक सख्ती की कमी के कारण निर्दोष लोग अपनी जान गंवा देते हैं। अविदेश कुमार की मौत एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि आखिर इस खतरनाक धागे पर कब पूरी तरह लगाम लगेगी?
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