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असली मैसूरु रेशम की दीवानगी, सुबह 4 बजे से लाइन में खड़ी महिलाएं

असली मैसूरु रेशम की मांग इतनी ज़्यादा है कि वर्किंग डेज़ में भी महिलाएं सुबह 4 बजे से ही कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (KSIC) के शोरूम के बाहर पहुंच जाती हैं। शोरूम में लगी लंबी कतारों को सोशल मीडिया पर भी खूब सराहा गया। हालांकि राकेश कृष्णन सिम्हा नाम के एक यूजर ने वीडियो साझा कर मैसूरु रेशम की सीमित आपूर्ति पर सवाल उठाए।

Banglore news: असली मैसूरु रेशम की मांग इतनी ज़्यादा है कि वर्किंग डेज़ में भी महिलाएं सुबह 4 बजे से ही कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (KSIC) के शोरूम के बाहर पहुंच जाती हैं, जबकि शोरूम सुबह 10 बजे खुलता है। मंगलवार को भी बेंगलुरु के केएसआईसी शोरूम में भारी भीड़ देखने को मिली। महंगी होने के बावजूद इन रेशमी साड़ियों का महिलाओं में जबरदस्त क्रेज है। इनकी कीमत 25,000 रुपये से शुरू होकर 3 लाख रुपये से भी अधिक तक जाती है, लेकिन महिलाएं इन्हें कीमत के लिए नहीं, बल्कि बेहतरीन क्वालिटी और समृद्ध विरासत के लिए पसंद करती हैं।

GI टैग वाली सिल्क साड़ियों पर महिलाओं का खास भरोसा

अधिकारियों के मुताबिक, केएसआईसी शोरूम में मिलने वाली मैसूरु रेशम की साड़ियों पर GI टैग लगा होता है, जो उनकी शुद्धता की गारंटी देता है। हर ज़री साड़ी पर एक यूनिक कोड और होलोग्राम भी होता है, जिससे उसकी प्रामाणिकता सुनिश्चित की जाती है। कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन देश का एकमात्र ऐसा संगठन है, जो रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया कोकून से लेकर तैयार साड़ी तक की निगरानी खुद करता है।

Banglore news: एक ही छत के नीचे पूरी रेशम प्रक्रिया

बेंगलुरु स्थित केएसआईसी शोरूम से जुड़ी जानकारी के अनुसार, यहां कोकून से रेशम निकालने से लेकर अलग-अलग रंगों और डिज़ाइनों में कपड़ा बुनने तक की पूरी प्रक्रिया एक ही परिसर में की जाती है। कॉर्पोरेशन अपनी वेबसाइट पर दावा करता है कि वह सिर्फ हाई क्वालिटी प्राकृतिक रेशम और 100 प्रतिशत शुद्ध सोने की ज़री का इस्तेमाल करता है। केएसआईसी के मुताबिक, उनकी ज़री समय के साथ काली नहीं पड़ती और सालों के इस्तेमाल के बाद भी उसकी चमक बरकरार रहती है।

Banglore news: साड़ियों के लिए लंबी कतार और टोकन सिस्टम

बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा रोड स्थित केएसआईसी शोरूम में ग्राहकों की भीड़ को संभालने के लिए टोकन सिस्टम लागू किया गया है। एक टोकन पर ग्राहक को सिर्फ एक ही साड़ी खरीदने की अनुमति दी जाती है। शनिवार को शोरूम में लगभग 50 साड़ियां उपलब्ध होती हैं, जो आमतौर पर सोमवार सुबह तक बिक जाती हैं। पिछले हफ्ते शोरूम में 60 साड़ियां आई थीं, जिनमें से कुछ बेहद महंगी साड़ियों को छोड़कर लगभग सभी बिक गईं।

सिल्क साड़ी: खरीदारी नहीं, एक परंपरा

Banglore news: शोरूम में लगी लंबी कतारों को सोशल मीडिया पर भी खूब सराहा गया। हालांकि राकेश कृष्णन सिम्हा नाम के एक यूजर ने वीडियो साझा कर मैसूरु रेशम की सीमित आपूर्ति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मैसूर सिल्क के प्रोडक्ट्स पर केएसआईसी का आधिकारिक अधिकार है। कई महिलाओं के लिए केएसआईसी शोरूम से रेशम की साड़ी खरीदना सिर्फ शॉपिंग नहीं, बल्कि एक भावनात्मक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह बेंगलुरु के शाश्वत शिल्प कौशल और भारतीय हथकरघा पर उनके अटूट विश्वास को दर्शाता है।

 

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