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मोहम्मदी तहसील में ‘कमीशनखोर’ कानूनगो का खेल खत्म! एंटी-करप्शन के जाल में फंसा 5 हजार का ‘भूखा भेड़िया’, रंगेहाथों गिरफ्तारी

Lakhimpur Kheri
Lakhimpur Kheri

Lakhimpur Kheri: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद की मोहम्मदी तहसील में आज उस वक्त ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’ शुरू हो गया, जब लखनऊ से आई एंटी-करप्शन की टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया। तहसील के गलियारों में खुद को ‘जमीन का भगवान’ समझने वाला कानूनगो भूपेंद्र सिंह आज ₹5000 की मामूली रिश्वत लेते हुए चूहों की तरह जाल में फंस गया। यह कोई साधारण गिरफ्तारी नहीं थी, बल्कि उन भ्रष्ट तंत्रों पर करारा तमाचा था जो गरीब किसानों के पसीने की कमाई पर ‘डाका’ डालते हैं।

रिश्वत का रेटकार्ड और किसान की बेबसी

खबर की परतें खोलें तो पता चलता है कि मोहम्मदी तहसील में ‘बिना नोट, नहीं होगा वोट’ जैसी स्थिति बनी हुई थी। एक बेबस किसान अपने ही खेत की मेढ़बंदी (सीमांकन) के लिए महीनों से तहसील की दहलीज घिस रहा था। लेकिन कानूनगो भूपेंद्र सिंह के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही थी। आरोपी कानूनगो ने साफ कह दिया था “काम कराना है तो दक्षिणा चढ़ानी होगी।” खेत की पैमाइश करने के बदले कानूनगो ने ₹5000 की रिश्वत मांगी थी। जब भ्रष्टाचार की सीमा लांघ गई, तो पीड़ित किसान ने घुटने टेकने के बजाय एंटी-करप्शन टीम (लखनऊ) से संपर्क साधा। टीम ने किसी फिल्मी स्क्रिप्ट की तरह जाल बिछाया। किसान को केमिकल (फिनोलफ्थलीन पाउडर) लगे हुए ₹5000 के नोट दिए गए।
22 जनवरी की दोपहर, जैसे ही किसान ने तहसील परिसर में कानूनगो को रिश्वत के नोट थमाए, वैसे ही सादे कपड़ों में छिपे एंटी-करप्शन के शिकारी बाजों की तरह टूट पड़े। कानूनगो भूपेंद्र सिंह को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

जैसे ही टीम ने कानूनगो के हाथ पानी में धुलवाए, पानी का रंग दूधिया से ‘गुलाबी’ हो गया। यह इस बात का वैज्ञानिक सबूत था कि कानूनगो के हाथ रिश्वत की गंदगी से सने हुए थे। गिरफ्तारी के बाद कानूनगो के चेहरे की हवाइयां उड़ गईं और वह गिड़गिड़ाने लगा, लेकिन कानून के शिकंजे ने उसे अपनी गिरफ्त में ले लिया था। इस गिरफ्तारी की खबर आग की तरह तहसील में फैली और देखते ही देखते कई बाबू और लेखपाल अपना काम छोड़कर चंपत हो गए।

Lakhimpur Kheri: तहसील बना ‘उगाही का अड्डा’

मोहम्मदी तहसील में हुई इस कार्रवाई ने एक कड़वा सच उजागर कर दिया है। क्या उत्तर प्रदेश में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैं कि ₹5000 के लिए एक राजपत्रित अधिकारी (Gazetted Officer) स्तर का कर्मचारी अपनी साख बेच देता है? भ्रष्टाचार का दीमक: मेढ़बंदी और वरासत जैसे मामलों में मोहम्मदी तहसील में लूट मची हुई है। अंधा प्रशासन: स्थानीय आला अधिकारी क्या सो रहे थे जो उनकी नाक के नीचे यह घूसखोरी का साम्राज्य चल रहा था?

एंटी-करप्शन टीम आरोपी कानूनगो भूपेंद्र सिंह को लेकर मोहम्मदी थाने पहुंची, जहाँ उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। अब आरोपी को जेल भेजने की तैयारी पूरी है। साथ ही सूत्र बताते हैं कि अब इस बात की भी जांच होगी कि ₹5000 की घूस लेने वाले इस कानूनगो ने अपनी सेवा के दौरान कितनी ‘बेनामी संपत्तियां’ खड़ी की हैं। मोहम्मदी में आज हुई इस कार्रवाई ने उन सभी भ्रष्ट अधिकारियों को चेतावनी दे दी है जो जनता को अपना गुलाम समझते हैं। किसान के ₹5000 भले ही छोटी रकम लगें, लेकिन यह गिरफ्तारी भ्रष्टाचार के ताबूत में आखिरी कील साबित होगी।

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