Lakhimpur Kheri: केंद्रीय बजट से पहले टैक्स बढ़ने की अटकलों को आधार बनाकर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के नगर मोहम्मदी में सिगरेट, गुटखा और पान मसाला की संगठित कालाबाजारी का मामला सामने आया है। थोक विक्रेताओं के एक कथित सिंडिकेट पर आरोप है कि उन्होंने बिना किसी सरकारी आदेश के दाम बढ़ाकर बाजार में कृत्रिम कमी (Artificial Scarcity) पैदा कर दी है, जिससे आम उपभोक्ता और छोटे दुकानदार सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
एमआरपी से ऊपर वसूली
स्थानीय फुटकर व्यापारियों के अनुसार, कई नेशनल ब्रांड की सिगरेट और पान मसाला प्रिंटेड एमआरपी से 20–30 प्रतिशत अधिक कीमत पर जबरन दी जा रही है।
कैप्टन सिगरेट (एमआरपी ₹60) थोक में ₹65–₹70 में
गोल्ड फ्लैक सिगरेट (एमआरपी ₹88) ₹92 से ₹100 तक
किशोर पान मसाला का ₹150 वाला पैकेट ₹180 में
आरोप है कि गोदामों में पर्याप्त स्टॉक होने के बावजूद थोक विक्रेता जानबूझकर माल रोक रहे हैं और दबाव में आकर फुटकर दुकानदार महंगे दामों पर खरीदारी करने को मजबूर हैं।
Lakhimpur Kheri: बाजार में बढ़ा तनाव
थोक में बढ़े दामों का सीधा असर फुटकर बाजार पर पड़ा है। पहले जो ग्राहक को ₹10 में 4 पुड़िया मिलती थीं, अब दुकानदार ₹10 में 3 पुड़िया देने को मजबूर हैं। इससे दुकानों पर आए दिन तीखी नोकझोंक और विवाद की स्थिति बन रही है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि ग्राहक उन्हें दोषी मान रहे हैं, जबकि असली वजह थोक बाजार में चल रही मनमानी है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
मामले में सबसे चिंताजनक पहलू प्रशासनिक कार्रवाई का अभाव बताया जा रहा है। आरोप है कि एसडीएम मोहम्मदी, पूर्ति विभाग और बाट-माप विभाग की जानकारी में होने के बावजूद अब तक कोई ठोस छापेमारी या कार्रवाई नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या एमआरपी से अधिक वसूली कानूनन अपराध नहीं है? गोदामों में डंप माल पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं? बाजार में बढ़ते तनाव से किसी बड़ी घटना की आशंका को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है?
Lakhimpur Kheri: जनता की मांग- सख्त कार्रवाई हो
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि थोक गोदामों पर तत्काल छापेमारी की जाए, एमआरपी से अधिक दाम वसूलने वालों के लाइसेंस रद्द हों, जमाखोरी करने वालों पर सख्त कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए और बाजार में पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए।







