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बसंत पंचमी 2026: बाबा श्रीकाशी विश्वनाथ का तिलक समारोह, जानें होली से पहले का महत्व

माता सरस्वती की पूजा और महाशिवरात्रि की तैयारियां बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ होती हैं। इस दिन काशी विश्वनाथ मंदिर सहित अन्य मंदिर सजाए जाते हैं और भक्त बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। रंगभरी एकादशी और गौना के माध्यम से होली की शुरुआत भी होती है।
बाबा काशी विश्वनाथ का तिलक आज

Vasant Panchami Kashi: माता सरस्वती की पूजा और वसंत ऋतु के आगमन के चलते वसंत पंचमी काशीवासियों के लिए खास महत्व रखती है। इस दिन काशी विश्वनाथ के मस्तक पर तिलक लगाया जाता है और भगवान शिव-पार्वती के भव्य विवाह यानी महाशिवरात्रि की तैयारियां विधिपूर्वक शुरू हो जाती हैं।

तिलक समारोह और मंदिरों की सजावट

यह परंपरा काशी की प्राचीन संस्कृति का जीवंत प्रतीक है। तिलकोत्सव के बाद विवाह और गौना की रस्में भक्ति और धूमधाम के साथ संपन्न होती हैं। मंदिर परिसर में सजावट, पूजा-अर्चना और भक्तों का उत्साह देखने लायक होता है।

Vasant Panchami Kashi: बाबा काशी विश्वनाथ का तिलक आज
बाबा काशी विश्वनाथ का तिलक आज

काशी की परंपरा के अनुसार, वसंत पंचमी पर बाबा विश्वनाथ का तिलक लगाया जाता है, जिससे महाशिवरात्रि की तैयारियों की शुरुआत होती है। इस दिन बाबा को विवाह के लिए तैयार किया जाता है। विवाह महोत्सव महाशिवरात्रि पर मनाया जाता है, जबकि गौना (परिवहन या विदाई) रंगभरी एकादशी को होता है। रंगभरी एकादशी पर भगवान शिव माता पार्वती के साथ काशी लौटते हैं और होली का उत्सव शुरू होता है। इस दिन मंदिरों में भगवान को अबीर-बुक्का चढ़ाकर पूजा की जाती है।

Vasant Panchami Kashi: काशी में धूमधाम और भक्तों का उत्सव

दृक पंचांग के अनुसार, महाशिवरात्रि रविवार, 15 फरवरी को है। यह फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को पड़ती है। निशिता काल की पूजा मध्यरात्रि में होती है, जब भक्त रात्रि जागरण, व्रत और शिव पूजन करते हैं। काशी में इस दिन बाबा विश्वनाथ का विवाह महोत्सव बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। शहर के छोटे-बड़े मंदिर सजाए जाते हैं और भक्तों की भीड़ से पूरे इलाके में उत्सव का माहौल रहता है।

Vasant Panchami Kashi: बाबा काशी विश्वनाथ का तिलक आज
बाबा काशी विश्वनाथ का तिलक आज

काशी विश्वनाथ मंदिर के साथ ही गौरी केदारेश्वर मंदिर, अमरनाथ मंदिर, तिलभांडेश्वर मंदिर, लोलार्केश्वर मंदिर, महामृत्युंज्य महादेव मंदिर, बनखंडी महादेव मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन और पूजा के लिए बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।

रंगभरी एकादशी और होली की शुरुआत

इसके बाद आती है रंगभरी एकादशी, जिसे अमलकी एकादशी भी कहा जाता है। यह पर्व 27 फरवरी, शुक्रवार को पड़ता है। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की इस एकादशी पर काशी विश्वनाथ मंदिर में भगवान शिव की अर्धांगिनी माता पार्वती का गौना होता है। इसके बाद होली का त्योहार शुरू होता है, जिसे मसान होली और रंगों के साथ मनाया जाता है। भक्त बड़ी संख्या में इस उत्सव में भाग लेते हैं। मान्यता है कि श्मशान में इसी दिन बाबा अपने गण के साथ होली खेलते हैं।

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