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ट्रंप की टैरिफ नीति बेअसर, ट्रेड डील्स में भारत ने अमेरिका को छोड़ा पीछे

International News: पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ आधारित व्यापार नीति अपेक्षित नतीजे देने में नाकाम साबित हुई है। इसी बीच भारत द्वारा लगातार किए जा रहे व्यापार समझौतों ने अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय नीति सलाहकार संस्था वेदा पार्टनर्स की को-फाउंडर हेनरीटा ट्रेज के अनुसार वर्ष 2025 में ट्रेड डील्स के मामले में भारत, अमेरिका से कहीं आगे निकल चुका है।

व्यापार को लेकर आक्रामक बयानबाजी तो की गई

एक इंटरव्यू में हेनरीटा ट्रेज ने बताया कि वॉशिंगटन में इस बात को लेकर बेचैनी है कि भारत ने इस साल ट्रंप प्रशासन की तुलना में सौ फीसदी से ज्यादा व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका में व्यापार को लेकर आक्रामक बयानबाजी तो की गई, लेकिन उन्हें ठोस समझौतों में तब्दील करने में सरकार सफल नहीं हो सकी।

International News: 90 दिनों में 90 डील्स का वादा, सिर्फ दो समझौते

ट्रेज ने याद दिलाया कि ट्रंप प्रशासन ने 90 दिनों में 90 ट्रेड डील्स करने का वादा किया था, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग रही। उन्होंने कहा कि करीब 10 महीनों के भीतर अमेरिका सिर्फ कंबोडिया और मलेशिया के साथ ही समझौते कर सका, जबकि दक्षिण कोरिया जैसे अहम रणनीतिक साझेदार के साथ डील आगे नहीं बढ़ पाई।

उन्होंने यह भी बताया कि ट्रंप सरकार के सत्ता में आने से पहले अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच 96 प्रतिशत व्यापार मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत कवर होता था, जहां लगभग शून्य टैरिफ लागू था। मौजूदा टैरिफ आधारित नीति से अमेरिका को खास फायदा नहीं मिल सका।

ईयू, जापान और दक्षिण कोरिया पर दबाव भी बेअसर

ट्रेज के मुताबिक, टैरिफ को दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की नीति यूरोपीय संघ, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे बड़े व्यापारिक साझेदारों के साथ भी कारगर साबित नहीं हुई। उन्होंने कहा कि ट्रंप द्वारा पूरे साल अपनाया गया सख्त रवैया किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सका।

International News:  अमेरिकी जनता में भी बढ़ा असंतोष

हेनरीटा ट्रेज ने अमेरिकी जनता के बीच बढ़ते असंतोष की ओर भी इशारा किया। उन्होंने बताया कि लगभग 50 प्रतिशत अमेरिकी चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट टैरिफ नीति को रद्द कर दे। इस विरोध के चलते सरकार के लिए अपनी आर्थिक नीतियों का बचाव करना और ज्यादा मुश्किल हो गया है।

व्हाइट हाउस पर बढ़ता राजनीतिक दबाव

ट्रेज का कहना है कि व्यापार नीति से जुड़े नकारात्मक राजनीतिक प्रभावों का दबाव अब सीधे व्हाइट हाउस पर पड़ रहा है। राष्ट्रपति मतदाताओं को अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर भरोसा दिलाना चाहते हैं, लेकिन रुकी हुई ट्रेड डील्स और टैरिफ का बोझ उनके राजनीतिक समर्थन को कमजोर कर रहा है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा व्यापार नीतियां न सिर्फ राष्ट्रपति की लोकप्रियता पर असर डाल रही हैं, बल्कि पूरे देश में रिपब्लिकन पार्टी के प्रदर्शन को भी प्रभावित कर रही हैं। भले ही ट्रंप प्रशासन ‘अमेरिका के साथ कारोबार करो’ की नीति पर जोर दे रहा हो, लेकिन ठहरे हुए व्यापार और सीमित समझौतों के बड़े राजनीतिक नतीजों को अब नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा है।

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