UGC Act: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जनपद में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर ब्राह्मण समुदाय के भीतर भारी आक्रोश व्याप्त है। केंद्र सरकार और यूजीसी की नीतियों के विरोध में जिले के प्रमुख ब्राह्मण संगठनों ने एकजुट होकर बिगुल फूंक दिया है। इस सिलसिले में शहर के ब्राह्मण धर्मशाला में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि केंद्र सरकार की ‘जनविरोधी’ शिक्षा नीतियों के खिलाफ आज यानी 29 जनवरी को जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा।
ब्राह्मण समन्वय समिति की बैठक में बनी रणनीति
लखीमपुर खीरी स्थित ब्राह्मण धर्मशाला में ब्राह्मण समुदाय के आधा दर्जन से अधिक संगठनों की एक संयुक्त बैठक बुलाई गई। इस बैठक की अध्यक्षता करते हुए ब्राह्मण समन्वय समिति के पदाधिकारियों ने यूजीसी के प्रस्तावित बदलावों पर गंभीर चिंता व्यक्त की। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि यूजीसी द्वारा लाए जा रहे नए कानून न केवल उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करेंगे, बल्कि शिक्षित युवाओं के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ करेंगे। बैठक के दौरान प्रगतिशील ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष नन्द कुमार मिश्र ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों से सामान्य वर्ग और विशेषकर ब्राह्मण समाज के मेधावी छात्रों के हितों पर कुठाराघात हो रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्राह्मण समाज अब चुप नहीं बैठेगा और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करेगा।
UGC Act: DM को सौंपा जाएगा ज्ञापन
बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, नन्द कुमार मिश्र ने बताया कि आज 29 जनवरी को सुबह 11 बजे जिले के सभी संगठनों के प्रतिनिधि और भारी संख्या में समाज के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचेंगे। वहां प्रधानमंत्री को संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को सौंपा जाएगा। इस ज्ञापन के माध्यम से मांग की जाएगी कि यूजीसी के उन काले कानूनों और नियमों को तत्काल वापस लिया जाए जो समाज के ताने-बाने और युवाओं के रोजगार के अवसरों को बाधित कर रहे हैं।
इस समन्वय बैठक में जिले के विभिन्न ब्राह्मण संगठनों के अध्यक्षों और पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे। बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर चर्चा हुई…
* शैक्षणिक स्वायत्तता का हनन: वक्ताओं ने आरोप लगाया कि यूजीसी के नए नियमों से विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता खत्म हो जाएगी।
* नियुक्ति प्रक्रिया में विसंगतियां: उच्च शिक्षण संस्थानों में असिस्टेंट प्रोफेसर और अन्य पदों पर भर्ती के लिए जो नए मानक तय किए जा रहे हैं, उनसे योग्य उम्मीदवारों के बाहर होने का खतरा है।
* सामाजिक असंतोष: संगठनों का मानना है कि इन नियमों के पीछे की मंशा शैक्षणिक संस्थानों के मूल स्वरूप को बदलना है।
विभिन्न संगठनों के अध्यक्षों ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि लखीमपुर खीरी का ब्राह्मण समाज हमेशा से न्याय और शिक्षा का पक्षधर रहा है। यदि हमारी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो यह आंदोलन केवल जिले तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे प्रदेश स्तर पर ले जाया जाएगा।
प्रशासनिक सतर्कता
29 जनवरी को होने वाले इस प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के कार्यक्रम को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहने की उम्मीद है। चूंकि ज्ञापन जिले की तेजतर्रार जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को दिया जाना है, इसलिए ब्राह्मण समन्वय समिति ने अपने कार्यकर्ताओं से शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से अपनी बात रखने की अपील की है। नन्द कुमार मिश्र ने अंतिम संबोधन में कहा कि हमारा उद्देश्य किसी व्यवस्था को बाधित करना नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री तक अपनी पीड़ा पहुंचाना है। हमें विश्वास है कि जिलाधिकारी के माध्यम से हमारी आवाज दिल्ली तक पहुंचेगी और यूजीसी के इन विवादित कानूनों पर केंद्र सरकार पुनर्विचार करेगी। आपको बता दें कि आज होने वाले इस कार्यक्रम में जिले भर से ब्राह्मण समुदाय के प्रबुद्ध जनों, वकीलों, शिक्षकों और छात्र नेताओं के जुटने की संभावना है, जिससे प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
Report BY: संजय कुमार
ये भी पढ़े… UGC विवाद में सियासी भूचाल, बुलंदशहर में BJP के 10 बूथ अध्यक्षों ने दिया इस्तीफा







